अमीरों के शहर में

Keshav Rawat

अमीरों के शहर में कुछ सस्ता ना मिला
देखा जो चेहरा इनका कोई हँसता ना मिला
मतलब निकाले हर कोई यहाँ
यहाँ कोई प्यार करता ना मिला

लिबास सबका महँगा देखा
चरित्र सबका सस्ता मिला
औरत देखी गैरों के साथ
हर मर्द धोखा करता मिला

महलों जैसे घर बने थे
घर के बाहर पहरा दिखा
तस्वीरो मे सब साथ दिखे
पर सबका कमरा अलग दिखा

चेहरे सबके सजे हुए थे
दिल मे सबके खोट दिखा
साथ जो बैठा 2 पल को मैं
हर शख्स मुझे अकेला मिला

घर मे देखा मंदिर बड़ा
मंदिर मे ना राम मिला
मा मिली वृद्ध आश्रम मे
बाप सड़क के पार मिला

दौलत से अमीर है दिखते
इनसे बड़ा ना ग़रीब दिखा
घूम के आया शहर जो इनके
इनसे बड़ा ना चोर मिला

अमीरो के शहर में कुछ सस्ता ना मिला
देखा जो चेहरा इनका कोई हँसता ना मिला

~ Keshav Rawat

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सांझी बात एक विमर्श बूटी है जीवन के विभिन्न आयामों और परिस्थितियों की। अवलोकन कीजिए, मंथन कीजिए और रस लीजिए वृहत्तर अनुभवों का अपने आस पास।

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