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लापरवाह

मैंने तो सिर्फ तुझे जीने की हिदायतें दी थी मेरा डांटना तेरे लिए कोई ज़हर नहीं है मिट्टी की सौंधी खुशबू पसंद है तो क्या करें ये...

संभलना जरा उस से नजरें बचाकर

संभलना जरा उस से नजरें बचाकर कहीं बेवकूफ ना बना दे खूबसूरती दिखा कर आंखों ने बहुत धोखे दिए हैं मेहरबान कभी नजरें मिलाकर कभी नजरें झुकाकर बस...

अनिश्चित…

ये क्या प्रतिकूल परिस्थितियां है मेरे जीवन में, कहीं भी स्वतंत्रता का भान नहीं, बस जीवन व्यतीत हो रहा एक दास की भांति, जहां...

खाक बड़ा था ये समंदर भी

खाक बड़ा था ये समंदर भी एक बूंद भी तिश्नगी इस से नहीं बुझी बढ़ाए थे अपने कदम कि रास्ते मिलेंगे पर जाने क्यों अपनी मंजिलें नहीं...

सांसें उखड़ रही है… भाग -2

सांसें उखड़ रही रही हैं जिंदगी उजड़ रही हैं ना पैसे का रूवाब है ना वक्त की बिसात है ये अपने सीने में जज़्ब कर लेगा ज़हर है, नसों...

सांसें उखड़ रही है… भाग -1

सांसे उखड़ रही है वक्त से पहले उम्र भी पहले ही खत्म हो रही है जिंदगी को बचाने की जद्दोजहद है आस भी जीने की कम हो...

भूख सर्दी से कम नहीं

वो ठिठुरता हुआ कूड़ा बीनता है सर्दी में उसे पता है कि भूख सर्दी से कम नहीं कहां सुनवाई होती है गरीब की यहां पर उनका दर्द...

मेरे घर में तो आजकल दंगा है

कौन से शहर का तू बाशिंदा है मेरे घर में तो आजकल दंगा है बस भाषणों तक सीमित रहती है कार्यवाही बाकी तो प्रशासन खोखला और नंगा...

रूह से रूबरू

यूं किसकी फिराक में रहता है दिल रूह से रूबरू होता तो बाहर नहीं भटकता तेरा घूंघट चेहरे की हिफाज़त करता है बहुत कोशिशों पर भी नीचे...

जुस्तजू

मुझे नहीं तो मेरे एहसास को तवज्जो दे तुझे देखा है मैंने रोज़ खवाबों में तुझे देख गली से जब मुड़ना हुआ कीचड़ सन गया था मेरी...
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