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कशमकश

वक़्त की सुरंग से जाने कितने लम्हे निकले कुछ आगे चले गए कुछ रह गए पीछे सुकून भी बेहिसाब सबको की गिरफ्त में है अश्कों ने चेहरों...

छोटे शहरों, गाँवो और कस्बों से आए हुए लोग

छोटे शहरों, गाँवो और कस्बों से आए हुए लोग... न जाने कितने अरमानो का भारी बोझ लिए मुंबई, दिल्ली, कलकत्ता, बैंगलोर जैसे बड़े शहरों...

सिरौना गाँव की एक अविस्मरणीय यात्रा : कुछ विचार एक...

मोतिहारी जिले का एक मनोरम गाँव "सिरौना" जिसका अपना एक इतिहास है। कभी इतिहास के पन्नों को खंगालेंगे तो इस गाँव का दर्शन आपको...

देखा – सुना

सूखे हुए उजाले अब अँधेरे हो गए दीवारों पर रेंगती हुई ज़िंदगी की खातिर कुछ पल है जो चमकती रेत में खो गए आसरा भी उम्मीद का...

किरायेदार

शारिक कुरैशी बड़ा ही लालची, बद्तमीज और जलनखोर आदमी है। पिताजी उसके पंचर लगाते थे और उसकी कबाडी की पुश्तैनी दुकान थी। जालसाज़ी उसने...

दिल एक सुकून

दिल एक सुकून की तलाश में रहता है अपना हाल-ए-दिल सबसे कहता है पांव टिकते नहीं जो थोड़ी ख़ुशी मिली कौन कब तक यहाँ खुश रहता है यहाँ...

साँझ का एक टुकड़ा

टूटी हुई शाखें दरख़्त के मायने तलाशती हैं बिखरी हुई पत्तियां मिटटी के घरोंदे सजाती है कभी जो अनजाने में तुमसे गलती हो गई पल भर मे...

इस छोर पर ज़िन्दगी खड़ी है

इस छोर पर ज़िन्दगी खड़ी है कई इरादे दिल में लिए सुस्ती का कुछ ऐसा नशा है कि बिस्तर से अभी नहीं उठे आँखों में बेशर्मी का पर्दा...

कोई फर्क नहीं पड़ता

पहले लगता था कि कोई नाराज़ है यकीन मानो अब कोई फर्क नहीं पड़ता। दिल के दरवाजों में अब कुण्डी लगा दी है अब कोई कितना भी...

क्यों हो रहा है निराश

उठ! क्यों हो रहा है निराश अब मत हो तू इतना हताश जीवन अभी बहुत पड़ा है क्यों जीवन से रूठा खड़ा है कठिनाई का करना होगा सामना वक़्त...
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