बेक़दरों से प्यार

Keshav Rawat

स्वाभाविक थी नाराज़गी मेरी प्यार भी तुम्हारा झूठा था
बहुत लुटाया बेक़दरो पर मेरी बारी में मुझको लूटा था

तुमने चाहा किसी और को फिर भी मैं तेरे लिये रोता था
तेरे झूठे बहानों को सच समझ के खुश होता था

वो चाहता किसी और को था और साथ मेरे रहता था
वक़्त बिताने के लिए झूठी हमदर्दी देता था

कोई शिकायत नहीं तुमसे बस इतना बता देता
जब प्यार नहीं था मुझसे तो झूटे वादे क्यूँ करता था

क्या कमी थी मेरे प्यार में जो तुमने मुझे तोड़ दिया
वक़्त बिताने के लिए मेरे दिल को तोड़ दिया

जिसे फ़र्क़ नहीं पड़ा मेरे प्यार से
उस बेवफ़ा को मैंने आज छोड़ दिया

मेरा तो वक़्त ख़राब आया
जिसने तेरा असली चेहरा दिखाया
तेरे झूठे प्यार को मेरे सामने लाया

मेरे दिल के टुकड़े तेरे रास्ते में आयेंगे
एक दिन इस बेवफ़ा को हम भूल जाएँगे

आज खुश हो किसी का घर उजाड़ कर
कल ख़ुद के घर में रोना आएगा

कुदरत देगी धोखा जिस दिन
उस दिन केशव को दिया धोखा याद आएगा

~ Keshav Rawat

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सांझी बात एक विमर्श बूटी है जीवन के विभिन्न आयामों और परिस्थितियों की। अवलोकन कीजिए, मंथन कीजिए और रस लीजिए वृहत्तर अनुभवों का अपने आस पास।

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