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भेड़चाल से स्वावलम्बन की ओर

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भेड़चाल से स्वावलम्बन की ओर
भेड़चाल से स्वावलम्बन की ओर

श्याम को उसके कंपनी के बॉस ने आज अल्टीमेटम दे दिया था, कि उसके पास अब एक हफ्ता है ताकि वो नयी नौकरी ढूंढ सके। श्याम को नौकरी छूटने का मलाल बिलकुल नहीं था, मगर उसकी दिक्कत ये थी कि वो सीधी बात करना जानता था, गलत बात पर अपने सीनियर को तो छोडो कई बार अपने बॉस को ही कटघरे में खड़ा कर देता था। पहले तो उसकी साफगोई सबको पसंद थी, मगर उसकी साफगोई के कारण कंपनी के कई क्लाइंट्स ने कंपनी के साथ अपना कॉन्ट्रैक्ट ख़तम कर दिया था जिसकी वजह से उसकी बॉस के साथ बहस हो गयी और नौबत नौकरी से निकालने की आ गई। खैर कोई नहीं, श्याम तो वैसे भी अल्हड मस्त आदमी है, पैसे तो कभी कमाया नहीं मगर कभी फालतू खर्च भी नहीं किया।

दोस्तों ने कितना कहा कि भाई कभी पार्टी वगैरह कर लिया कर, कभी हमारे साथ सिगरेट, दारू पी, मगर श्याम को ये चीज पसंद नहीं थी, उसको ये पैसे और सेहत की बरबादी लगती थी, जो वाकई में है भी, हालाँकि ये अलग बात है कि लोग उसको पुराने ज़माने का और भोंदू बुलाते हैं, क्योंकी वह उनकी नज़रों में फिट नहीं बैठता है।

अब वो नौकरी ढूंढ रहा है, वैसे तो श्याम के अंदर काफी अच्छाई है, मगर उसके अंदर काफी बुराइयां भी है, और हों भी क्यों न, आखिर वो भी एक इंसान ही हैं। एक तो वो बहुत आलसी है, दूसरा वो समय की कद्र नहीं करता, यही कारण है कि उसकी नौकरी में तरक्की नहीं हो पायी, मन कि उसने कभी किसी के साथ कुछ गलत नहीं किया, मगर उसने अपने साथ भी सही नहीं किया।

उसको उसके घरवालों ने काफी बार कहा कि सरकारी नौकरी के फॉर्म भर दे , उसने एक दो बार भरा भी मगर, जब वह उसमे पास नहीं हो पाया तो उसने फिर फॉर्म ही भरना बंद कर दिया, उसको ये नहीं पता कि सिर्फ फॉर्म भरने से सरकारी नौकरी नहीं मिलती, उसके लिए लगातार पढ़ना पड़ता है, अभ्यास करना पड़ता है, अच्छे टीचर का मार्गदर्शन चाहिए, लगातार प्रयास करने चाहिए, ऐसे ही थोड़े अमृत मिल जाएगा, उसके लिए मंथन तो करना पड़ेगा न, मगर उसको कौन समझाए

श्याम अभी एक आईटी कंपनी में डिजिटल मार्केटिंग एग्जीक्यूटिव है और साथ में कंटेंट राइटिंग भी करता है मगर इसके बावजूद भी उसकी सैलरी 20 हज़ार से ज़्यादा नहीं बढ़ी, इसका कारण ये है कि एक तो उसने अपनी स्किल्स अपग्रेड नहीं की और दूसरा उसने अच्छे ब्रांड्स की कम्पनीज में जॉब के लिए आवदेन नहीं किया, 5 साल होने को है और अब उसको डिजिटल मार्केटिंग के नाम से चिढ हो रही है, हालाँकि इसमें एक बात अच्छी है, उसकी कंटेंट राइटिंग स्किल्स बहुत अच्छी है जिसके कारण वो फ्रीलान्स कर रहा है और थोड़ा बहुत कमा लेता है, अपने 5 साल के करियर में उसने 15 से ज़्यादा कंपनियां बदली उसमे से मुश्किल से 2 ही कंपनियां ऐसे होंगी जिसमे वो 1 साल तक टिका होगा, नहीं तो किसी मे 2 महीने, कहीं 1 महीना, कही 3 महीना, ऐसे करके पूरी करियर का बंटाधार कर दिया उसने।

हालाँकि श्याम बहुत भाग्यशाली है जो उसे समझाने वाला परिवार और साथ में उसको मार्गदर्शन देने वाले ‘प्रकाश बाबू’ हैं जो समय समय पर उसे नयी नयी जानकारी देते हैं और साथ में मार्किट में जो नया चल रहा है उस से अवगत करवाते रहते हैं, श्याम को लिखने का बहुत शौक है, वह कविताये और कहानियां बहुत अच्छी लिखता है, एक दिन प्रकाश बाबू ने उसकी कविता और कहानी अपने ब्लॉग पर प्रकाशित कर दी, देखते ही देखते कविता और कहानी के पाठकों की संख्या बढ़ने लगी, जिनसे श्याम को और अच्छा लिखने की प्रेरणा मिलती रही और आज आलम ये है कि उसने अपना एक उपन्यास लिख लिया है और जो बाजार में धड़ल्ले से बिक रहा है और अब वो अपने नए उपन्यास और कहानी पर काम कर रहा है, और जिस डिजिटल मार्केटिंग जिस से वो चिढ रहा था उसने ही उसको ये नई राह दिखाई। हिंदी में कहानी तो इंग्लिश में कंटेंट आखिर एक राजा साबित हो ही गयी

दोस्तों हम सभी अपनी कॉर्पोरेट लाइफ से परेशान है क्योंकि ये हम सभी जानते हैं कि लगभग 90 प्रतिशत लोग अपनी प्रतिभा और परिश्रम के बावजूद कम वेतन पा रहे हैं, मगर हम लोग भी क्या करें हमें अपना परिवार भी चलाना है उसी नौकरी में में हमें सपने छोटे छोटेसपने पूरे करने है, हालाँकि नौकरी से सपने पूरे होंगे ऐसा कहने मुश्किल है, हम ये नही कह रहे कि इंसान को नौकरी नहीं करनी चाहिए, मगर ऐसी जगह भी काम करके क्या फायदा जहाँ कुछ नया सीखने को न मिले, जहाँ बस आप एक ही लकीर को पीट रहे हैं रोज़ और फिर आय नहीं बढ़ने का रोना रोते रहते हैं। बेहतर होगा की रोने से अच्छा आप अपने ऊपर काम करें, अपनी स्किल्स को बढ़ाये, जो भी आपके अंदर प्रतिभा है उसको तराशें और उसको परिष्कृत करें, जैसा श्याम ने किया, आज वो किसी नौकरी का मोहताज नहीं है, बल्कि स्वयं अपना स्वामी है, अपनी प्रतिभा को पहचाने और फिर आप देखेंगे की आप को न नौकरी जाने का भय होगा न ही पैसा कमाने की होड़ होगी क्योंकि ये दोनों चीजों से आप अपनी प्रतिभा के बल पर मुकाबला कर सकते हैं। अगर आपके अंदर कौशल है और आप उसे सही दिशा में उपयोग करने की क्षमता रखते हैं, और समय समय पर कुछ नया सीखने का भाव आपके अंदर हैं तो आप आम जीवन की इन परेशानी खासकर ये कॉर्पोरेट जीवन की नौकरी और सर्वाइवल की जंग वाली मानसिकता से बाहर आ जायेंगे साथ ही साथ विषम परिस्थितियों पर विजय प्राप्त कर सकेंगे।

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