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Politeness

विनम्रता

“विनम्रता कभी दुर्बलता नही हो सकती बल्कि वह तो व्यक्ति की सरलता का परिचायक है”। ब्रजेश जी की टिपण्णी: परंतु आज के दौर में विनम्रता कमजोरी का पर्याय बनकर रह गया हैं। विनम्र व्यक्ति को कोई भी धमका जाता हैं। उतर: विनम्रता भी...
मुकम्मल भी हुआ तो क्या हुआ ये इश्क़ है अपनी नादानी कहां छोड़ता है कभी तो खयालों को बसाता है और कभी सारे सपनो को तोड़ता है पन्ने पलटने में देर नहीं लगती और हवाओं का रूख भी मोड़ता है अकेले बैठे ये सोचता हूं...
मेरी उम्र अमूमन 5 साल तो बढ़ ही गयी होगी क्योंकि छठ पूजा के अवसर पर गाँव के प्राकृतिक एवं प्रदुषणमुक्त वातावरण में लगभग 7 दिनों तक निवास करने का मौका मिला .... प्रातः काल नींद खुलती थी चिड़ियों...
मिलता नहीं है यारों मंज़िल का निशां कहाँ पर आसमान और ज़मीन होते हैं फुर्सत नहीं है ज़िन्दगी में, लेकिन झमेला है वक़्त के तेवर भी बड़े महीन होते हैं सूखा और बदरंग तो नहीं है खैर खुशफहमी के मंज़र भी रंगीन होते हैं आसान...
अपनी यादों का क्या करें साहब मुझे सब कुछ पुराना याद है दीवारों से उड़ती हुई धूल भी देखी ज़मीन से उखड़ते हुए मकान भी देखे यूं हालातों से बेखबर हो जाना याद है कभी एक आवाज़ पर इकट्ठा हो गए तो कहीं एक दूसरे...
चिंगारी तभी सुलगती है जब हवा का साथ हो आग तभी लगती है जब धुआँ आस पास हो समंदर का वजूद भी उस नदी पर टिका है जिसके पास तेज़ और बहती धार हो यहाँ लोगों की ज़िन्दगी में सैकड़ो परेशानी है और उस...
किसे शौक था गाँव से बिछड़ने का बस रोटी की लाचारी थी जो शहर आ गए अपनी मिटटी के सौंधी सुगंध बड़ी प्यारी थी अब तो आस पास धुंए के ज़हर आ गए कच्ची पगडंडियों पे चलने का सुकून था यहाँ सड़कों पर कदम...
कहते हैं कि शर्म को अगर बेचकर पैसे मिले तो बेशर्म और ग़ैर ज़िम्मेदार व्यक्ति वो भी कर देगा! ऐसे बहुत से उदाहरण हमें अपने आस पास मिल जाएंगे। पड़ोस में, कार्यालय में और कई सारे क्षेत्रों...
प्रत्येक व्यक्ति जब वो अपने बचपन को जी रहा होता है उस के लिए उमंग-उत्साह का त्यौहार है दुर्गापूजा। प्रातः काल स्नान करके दुर्गापूजा और आरती में सम्मिलित होना.... नए कपड़े पहनने का उत्साह..... मिठाई की मिठास, दोस्तों का...
ये सांस का मुकद्दर भी कहां तक रहेगा वहीं, जहां धड़कनों का सैलाब बहेगा उनको कहां किस बात की कमी होगी यारों घरों में जब उनके सोना हीरा सजेगा मैं चाहता हूं वो कि वो तेज तर्रार रहें ढीले-ढालों का का तो जनाज़ा उठेगा साजिशें...