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विनम्रता

“विनम्रता कभी दुर्बलता नही हो सकती बल्कि वह तो व्यक्ति की सरलता का परिचायक है”। ब्रजेश जी की टिपण्णी: परंतु आज के दौर में विनम्रता कमजोरी...

मुकम्मल भी हुआ तो क्या हुआ

मुकम्मल भी हुआ तो क्या हुआ ये इश्क़ है अपनी नादानी कहां छोड़ता है कभी तो खयालों को बसाता है और कभी सारे सपनो को तोड़ता है पन्ने...

गाँव: जहाँ जीवन सिर्फ बसता ही नहीं खिलखिलाता भी है

मेरी उम्र अमूमन 5 साल तो बढ़ ही गयी होगी क्योंकि छठ पूजा के अवसर पर गाँव के प्राकृतिक एवं प्रदुषणमुक्त वातावरण में लगभग...

मिलता नहीं है यारों मंज़िल का निशां

मिलता नहीं है यारों मंज़िल का निशां कहाँ पर आसमान और ज़मीन होते हैं फुर्सत नहीं है ज़िन्दगी में, लेकिन झमेला है वक़्त के तेवर भी बड़े...

मुझे सब कुछ पुराना याद है

अपनी यादों का क्या करें साहब मुझे सब कुछ पुराना याद है दीवारों से उड़ती हुई धूल भी देखी ज़मीन से उखड़ते हुए मकान भी देखे यूं हालातों...

चिंगारी तभी सुलगती है जब हवा का साथ हो

चिंगारी तभी सुलगती है जब हवा का साथ हो आग तभी लगती है जब धुआँ आस पास हो समंदर का वजूद भी उस नदी पर टिका...

किसे शौक था गाँव से बिछड़ने का

किसे शौक था गाँव से बिछड़ने का बस रोटी की लाचारी थी जो शहर आ गए अपनी मिटटी के सौंधी सुगंध बड़ी प्यारी थी अब तो आस...

अरविंद केजरीवाल: भारतीय इतिहास का सबसे शातिर, धूर्त और निकम्मा नेता

कहते हैं कि शर्म को अगर बेचकर पैसे मिले तो बेशर्म और ग़ैर ज़िम्मेदार व्यक्ति वो भी कर देगा! ऐसे बहुत से उदाहरण ...

बचपन का दुर्गापूजा

प्रत्येक व्यक्ति जब वो अपने बचपन को जी रहा होता है उस के लिए उमंग-उत्साह का त्यौहार है दुर्गापूजा। प्रातः काल स्नान करके दुर्गापूजा और...

ये सांस का मुकद्दर भी कहां तक रहेगा

ये सांस का मुकद्दर भी कहां तक रहेगा वहीं, जहां धड़कनों का सैलाब बहेगा उनको कहां किस बात की कमी होगी यारों घरों में जब उनके सोना...