LATEST ARTICLES

The man raised his hands and broke the chains

ये सांस का मुकद्दर भी कहां तक रहेगा

ये सांस का मुकद्दर भी कहां तक रहेगा वहीं, जहां धड़कनों का सैलाब बहेगा उनको कहां किस बात की कमी होगी यारों घरों में जब उनके सोना...
crowded city life

जिंदगी पेचीदा है, शहर बज़्म से सजा है

जिंदगी पेचीदा है, शहर बज़्म से सजा है मेरे रुआब में कोई गर्द सा सटा है गैर जरूरी शिकवे यहां पुरजोर हैं और तल्खियों का अलग मसला...
Happy man

दिलों में इरादों की मशाल लेकर चलता हूं

कभी अपनी धुन में कभी बेपरवाह रहता हूं मैं परिंदों सा उड़ने का हौसला रखता हूं मुझे यकीन है कि कई लोग बड़े परेशान हैं मैं बस...
Man standing with open arms

दिलासा क्या दूँ दिल को

दिलासा क्या दूँ दिल को, ये भटक रहा है किसी और की सरपरस्ती में उछल रहा है जानता हूँ मैं ये कि गलत राह पर हूँ फिर...
शरीर थक गया, वहम का आगोश है

शरीर थक गया, वहम का आगोश है

शरीर थक गया, वहम का आगोश है और लोग कहते हैं जिंदगी में जोश है चीख कर दुनिया ने मेरा दर्द देखा और अपने अभी तक खामोश...
Man silhouette on beautiful sunset

धड़कने बयां करती है ज़िन्दगी की किश्तें

धड़कने बयां करती है ज़िन्दगी की किश्तें सांसों का गुच्छा अब टूट रहा है आगजनी होती है सोच में सभी के गुस्सा अब बेधड़क फूट रहा है जो...
The Kashmir Files

खुल रहे है दस्तावेज तो चिढ रहे हो

सांप से ही दोस्ती पाली थी हमने चांवल की बोरी में धंसकर मरोगे जिरह क्या करना जब सुनवाई नहीं है बेकार में क्यों किसकी दलीले सुनोगे वक़्त होते...
रोज़ देखता हूँ आसपास तो

रोज़ देखता हूँ आसपास तो

रोज़ देखता हूँ आसपास तो सवालों से भरे चेहरे परेशां करते हैं वही बेचैनी, वही नाकामयाबी और वही फितूर इतने सारे जज़्बात भी हैरान करते हैं चलते हुए...
आख़िर

आख़िर

मैं क्यों इस क़दर प्यार करूं मैं क्यों इस क़दर तुझपे मरूं देना तुझे अगर गम ही है तो, मैं क्यों इस क़दर तेरा इंतज़ार करूं सदियाँ बीत...
समर्थ व्यक्ति

समर्थ व्यक्ति

समर्थ व्यक्ति वो नहीं जिसके पास अपार धन और वैभव है बल्कि समर्थ वो है जो आलोचना को स्वीकार करने का माद्दा रखता हो...