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विनम्रता

Politeness

“विनम्रता कभी दुर्बलता नही हो सकती बल्कि वह तो व्यक्ति की सरलता का परिचायक है”। ब्रजेश जी की टिपण्णी: परंतु आज के दौर में विनम्रता कमजोरी का पर्याय बनकर रह गया हैं। विनम्र व्यक्ति को कोई भी धमका जाता हैं। उतर: विनम्रता भी उनके साथ दिखानी चाहिए जो इसके योग्य हों। जो व्यक्ति विनम्रता की भाषा नहीं समझता उसको दण्ड की भाषा में...

मुकम्मल भी हुआ तो क्या हुआ

Broken Heart

मुकम्मल भी हुआ तो क्या हुआ ये इश्क़ है अपनी नादानी कहां छोड़ता है कभी तो खयालों को बसाता है और कभी सारे सपनो को तोड़ता है पन्ने पलटने में देर नहीं लगती और हवाओं का रूख भी मोड़ता है अकेले बैठे ये सोचता हूं दिन भर कि क्यों ये दिल मुझे हर रोज टटोलता है खामोश तो मेरी जुबान रहती है अंदर तो दिल का जलवा बोलता...

गाँव: जहाँ जीवन सिर्फ बसता ही नहीं खिलखिलाता भी है

Village Life

मेरी उम्र अमूमन 5 साल तो बढ़ ही गयी होगी क्योंकि छठ पूजा के अवसर पर गाँव के प्राकृतिक एवं प्रदुषणमुक्त वातावरण में लगभग 7 दिनों तक निवास करने का मौका मिला .... प्रातः काल नींद खुलती थी चिड़ियों के मधुर चहचाहट से ....सुबह में सैर के लिए कछुआ नदी के किनारे सिरौना से हरनरैना गाँव तक टहलते चला...

मिलता नहीं है यारों मंज़िल का निशां

Ficus tree

मिलता नहीं है यारों मंज़िल का निशां कहाँ पर आसमान और ज़मीन होते हैं फुर्सत नहीं है ज़िन्दगी में, लेकिन झमेला है वक़्त के तेवर भी बड़े महीन होते हैं सूखा और बदरंग तो नहीं है खैर खुशफहमी के मंज़र भी रंगीन होते हैं आसान मत समझना ज़िन्दगी के फलसफे को इसके इरादे भी बड़े संगीन होते हैं कोई वजह ज़रूर है कि रब इम्तिहान ले रहा...

मुझे सब कुछ पुराना याद है

Bullock cart

अपनी यादों का क्या करें साहब मुझे सब कुछ पुराना याद है दीवारों से उड़ती हुई धूल भी देखी ज़मीन से उखड़ते हुए मकान भी देखे यूं हालातों से बेखबर हो जाना याद है कभी एक आवाज़ पर इकट्ठा हो गए तो कहीं एक दूसरे के बदन तोड़ दिए कुछ इस तरह का याराना याद है कच्ची पगडंडियों पर जब बैलगाड़ी थी दो वक्त की रोटी मिले यही...

चिंगारी तभी सुलगती है जब हवा का साथ हो

Burning matchstick

चिंगारी तभी सुलगती है जब हवा का साथ हो आग तभी लगती है जब धुआँ आस पास हो समंदर का वजूद भी उस नदी पर टिका है जिसके पास तेज़ और बहती धार हो यहाँ लोगों की ज़िन्दगी में सैकड़ो परेशानी है और उस पर हंसनेवालो तुम भी कमाल हो मज़ाक एक दायरे में ही सटीक बैठते है बेबात में ठहाके लगाना तो जैसे कोई...

किसे शौक था गाँव से बिछड़ने का

Sirauna

किसे शौक था गाँव से बिछड़ने का बस रोटी की लाचारी थी जो शहर आ गए अपनी मिटटी के सौंधी सुगंध बड़ी प्यारी थी अब तो आस पास धुंए के ज़हर आ गए कच्ची पगडंडियों पे चलने का सुकून था यहाँ सड़कों पर कदम लड़खड़ा गए वो गलियां, चौपाल और मोहल्ले की बतकही तुम्हे क्या बताएं हम कहाँ आ गए वो पेड़ों की छाँव और कड़कती धूप उन...

अरविंद केजरीवाल: भारतीय इतिहास का सबसे शातिर, धूर्त और निकम्मा नेता

अरविन्द केजरीवाल

कहते हैं कि शर्म को अगर बेचकर पैसे मिले तो बेशर्म और ग़ैर ज़िम्मेदार व्यक्ति वो भी कर देगा! ऐसे बहुत से उदाहरण हमें अपने आस पास मिल जाएंगे। पड़ोस में, कार्यालय में और कई सारे क्षेत्रों में आजकल ऐसे लोग बहुत मिल जाएंगे। हमारे देश भारत में आम आदमी और पत्रकारों का सबसे प्रिय विषय रहा है...

बचपन का दुर्गापूजा

Durga Puja memories

प्रत्येक व्यक्ति जब वो अपने बचपन को जी रहा होता है उस के लिए उमंग-उत्साह का त्यौहार है दुर्गापूजा। प्रातः काल स्नान करके दुर्गापूजा और आरती में सम्मिलित होना.... नए कपड़े पहनने का उत्साह..... मिठाई की मिठास, दोस्तों का हुजूम..... मेले के रंग बिरंगे पंडाल.....एक साथ कई लाऊडस्पीकर में अलग-अलग गानों का घाउंज-माऊंज.....कई अस्पष्ट गानों की स्वरलहरी से गूंजता...

ये सांस का मुकद्दर भी कहां तक रहेगा

The man raised his hands and broke the chains

ये सांस का मुकद्दर भी कहां तक रहेगा वहीं, जहां धड़कनों का सैलाब बहेगा उनको कहां किस बात की कमी होगी यारों घरों में जब उनके सोना हीरा सजेगा मैं चाहता हूं वो कि वो तेज तर्रार रहें ढीले-ढालों का का तो जनाज़ा उठेगा साजिशें कई की खुद को बचाने की लापरवाही से कौन कब तक बचेगा रोज झूठ के सहारे खड़े होते हो कल तुम्हारे साथ को...