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ये सांस का मुकद्दर भी कहां तक रहेगा

The man raised his hands and broke the chains

ये सांस का मुकद्दर भी कहां तक रहेगा वहीं, जहां धड़कनों का सैलाब बहेगा उनको कहां किस बात की कमी होगी यारों घरों में जब उनके सोना हीरा सजेगा मैं चाहता हूं वो कि वो तेज तर्रार रहें ढीले-ढालों का का तो जनाज़ा उठेगा साजिशें कई की खुद को बचाने की लापरवाही से कौन कब तक बचेगा रोज झूठ के सहारे खड़े होते हो कल तुम्हारे साथ को...

जिंदगी पेचीदा है, शहर बज़्म से सजा है

crowded city life

जिंदगी पेचीदा है, शहर बज़्म से सजा है मेरे रुआब में कोई गर्द सा सटा है गैर जरूरी शिकवे यहां पुरजोर हैं और तल्खियों का अलग मसला है तरकश में तीर बड़े कम हो चलें हैं हमलों का फिर भी ये क्या सिलसिला है शरीर को सताकर कारागार में हो पर रूह को झिंझोड़ने की सज़ा क्या है ईमान ए दिल का ख़ामियाजा उठाया सच की सोहबत का...

दिलों में इरादों की मशाल लेकर चलता हूं

Happy man

कभी अपनी धुन में कभी बेपरवाह रहता हूं मैं परिंदों सा उड़ने का हौसला रखता हूं मुझे यकीन है कि कई लोग बड़े परेशान हैं मैं बस अपने रास्तों को तैयार करता हूं कौन क्या कहता है इसके कोई मायने नहीं साथ कौन देगा इसकी परवाह करता हूं ज़मीन पर सूखे तिनके घास से बिखर गए मैं उनकी बागबानी भी बड़े करीने से करता हूं जिंदगी में...

दिलासा क्या दूँ दिल को

Man standing with open arms

दिलासा क्या दूँ दिल को, ये भटक रहा है किसी और की सरपरस्ती में उछल रहा है जानता हूँ मैं ये कि गलत राह पर हूँ फिर भी राह से दिल भटक रहा है औज़ार कुछ नहीं बस उसकी आँखें है और सीना मेरा दर्द से छलक रहा है ज़ोर आज़माइश बहुत की है मैंने मगर ये सफर बड़ा कम्बख्त रहा है एक निगाह भर...

शरीर थक गया, वहम का आगोश है

शरीर थक गया, वहम का आगोश है

शरीर थक गया, वहम का आगोश है और लोग कहते हैं जिंदगी में जोश है चीख कर दुनिया ने मेरा दर्द देखा और अपने अभी तक खामोश है जो कहते थे हम तेरा साथ देंगे वो तो एहसान फरामोश है फूलों ने बगीचे से दगा किया तो बाग़बां का इसमें क्या दोष है कौन रहता है यहाँ पर ईमान से सब जगह आजकल लूट खसोट है पैरवीं करने का...

धड़कने बयां करती है ज़िन्दगी की किश्तें

Man silhouette on beautiful sunset

धड़कने बयां करती है ज़िन्दगी की किश्तें सांसों का गुच्छा अब टूट रहा है आगजनी होती है सोच में सभी के गुस्सा अब बेधड़क फूट रहा है जो लम्बी दीवारों के महलों में थे उनका गुरूर भी टूट रहा है किए होंगे कारनामे तभी नाम आया लगता है रुआब भी अब छूट रहा है शोर के बाजार में मौन जैसे मर गया और आवाज़ का दुकानदार...

खुल रहे है दस्तावेज तो चिढ रहे हो

The Kashmir Files

सांप से ही दोस्ती पाली थी हमने चांवल की बोरी में धंसकर मरोगे जिरह क्या करना जब सुनवाई नहीं है बेकार में क्यों किसकी दलीले सुनोगे वक़्त होते हुए सम्भले नहीं बाद में अपना माथा रगडोगे अर्जियां बहुत है लगाने को यारों हलफनामे में मगर गैरहाज़िर रहोगे तुम्हे तो मुस्कुराने से परहेज़ है दूसरों की ख़ुशी कैसे समझोगे अदालतों से ख़ारिज है मुकदमा तुम्हारा ताज़िन्दगी अब तुम गुनहगार रहोगे बेतरतीब सा...

रोज़ देखता हूँ आसपास तो

रोज़ देखता हूँ आसपास तो

रोज़ देखता हूँ आसपास तो सवालों से भरे चेहरे परेशां करते हैं वही बेचैनी, वही नाकामयाबी और वही फितूर इतने सारे जज़्बात भी हैरान करते हैं चलते हुए एक मिटटी का ढेला मिला तो सरपट से उठा लिया कुछ सोचा नहीं और नदी के किनारे बैठ गया आँखों के आगे अंधेरों के सागर हैं न कम न ज़्यादा सभी बराबर हैं बस चंद लम्हों के लिए गालों पर...

आख़िर

आख़िर

मैं क्यों इस क़दर प्यार करूं मैं क्यों इस क़दर तुझपे मरूं देना तुझे अगर गम ही है तो, मैं क्यों इस क़दर तेरा इंतज़ार करूं सदियाँ बीत गयी है तेरी पुकार सुने तेरी आने की कोई भी आहट नही है अश्रु नयन मे भर आए मेरे मैं क्यों तुझसे वफादार रहूँ तेरा मेरा साथ ये ज़माने ने भी देखा है मेरे हाथो मे तेरी प्यार की...

समर्थ व्यक्ति

समर्थ व्यक्ति

समर्थ व्यक्ति वो नहीं जिसके पास अपार धन और वैभव है बल्कि समर्थ वो है जो आलोचना को स्वीकार करने का माद्दा रखता हो और वंचित लोगों की आवाज़ के साथ अपनी आवाज़ मिलाता हो