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इस्लामिक आतंकवाद विश्व शांति के सबसे बड़ा खतरा

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इस्लामिक आतंकवाद

राजनीतिक दलों का इस्लामी तुष्टीकरण उन्हें भारत के बहुसंख्यक नागरिकों पर अशांति और अत्याचार पैदा करने के लिए प्रेरित करेगा। धर्म के संदर्भ में अल्पसंख्यक को खुश करना एक दयनीय मानसिकता है। क्यों हमेशा गुस्से को दबाने के लिए हिंदू समुदाय की जिम्मेदारी होती है। क्यों लोग घातक जिहादियों के बारे में अधिक चिंतित हैं। यहां तक कि तथाकथित बुद्धिजीवी भी इन गद्दारों की कठपुतली हैं। ये छद्म बुद्धिजीवी सांप्रदायिकता के बारे में बकवास करते हैं और वेदिक सनातन धर्म को निशाना बनाते हैं। लेकिन उन्होंने इस्लामी कट्टरता और बर्बरता के प्रति मौन और अजीब अज्ञानता का परिचय दिया। इन संभ्रांत से दिखने वाले वर्ग का देश के कल्याण से कोई लेना-देना नहीं है, वे सिर्फ शांतिपूर्वक साम्प्रदायिकता और धर्मनिरपेक्षता पर दूसरों को उपदेश देना चाहते हैं। उन्होंने अपने जीवन में कभी भी जटिल परिस्थितियों का सामना नहीं किया। वास्तव में, वे दूसरों के बारे में अपनी सुविधा के अनुसार राय बना लेते है। ये पृथ्वी पर सिर्फ बेशर्म जीव हैं और हम हर समय उनका कचरा सहन कर रहे हैं, अब समय इन सभी का बहिष्कार करने का है क्योंकि उनकी विश्वसनीयता तब शून्य हो गई है जब उनके पास दो अलग-अलग समुदायों के लिए पक्षपाती मानदंड हैं।

क्या आपने कभी वामपंथी और नकली बुद्धिजीवियों के लिए सुना है कि इस्लामी आतंकवाद आज के परिदृश्य में दुनिया के लिए सबसे बड़ा खतरा है? उनके पास केवल एक अनुसमर्थन है और यह सबसे उबाऊ और विवादास्पद बयान है, आतंकवाद का कोई धर्म नहीं है, यदि आतंकवाद का कोई धर्म नहीं है, तो आतंकवादियों को मारने के बाद क्यों दफन किया जाता है, उन्हें समुद्र में भंग करना चाहिए, या हमारी शुद्ध भूमि से बाहर फेंक देना चाहिए।

राजनीतिक लोग बाहरी तौर पर यह कहने से डरते हैं कि अगर इस्लामिक आतंकवाद नहीं है, तो ये उलेमा और मौलवी आतंकवादियों का खुलकर विरोध क्यों नहीं कर रहे हैं। क्यों हमेशा आतंकवादियों की लाश के आसपास भीड़ जमा होती है। हमें इन चीजों के बारे में गहराई से सोचने की जरूरत है। काश्मीर इस्लामिक राज्य बन गया, केरल पूरी तरह से राष्ट्र विरोधी गतिविधियों में शामिल है। पश्चिम बंगाल एक जिहादी, पक्षपाती और इस्लामिक-केंद्रित ममता बनर्जी के कार्यकाल में हिंदू समुदाय के लिए सुरक्षित नहीं है। धर्मनिरपेक्षता की ये अफीम नर्क में धकेल रही है, अब हम मुस्लिम भाईचारे को सुनकर तंग आ गए हैं , हमें न्याय चाहिए, आखिर हम देश के बहुसंख्यक जनसंख्या हैं, अगर किसी तरह यह देश हिंदू राष्ट्र बन भी जाएगा, तो इसमें गलत क्या है, हम यह नहीं कह रहे हैं कि, हम किसी अन्य धर्म को यहाँ रहने की अनुमति नहीं देंगे, लेकिन हम यह कह रहे हैं कि इस राष्ट्र भारत में जड़ और सात्विक धर्म की जातीयता है, और हम अपनी संस्कृति और परंपरा से अपना मुंह नहीं मोड़ सकते हैं।

ये बुद्धिजीवी तो हिन्दू राष्ट्र के नाम पर भय का एक ऐसा वातावरण खड़ा करते हैं , जैसे की आने वाले समय में इनको सांस भी लेने नहीं दिया जायेगा , अरे सुवर की जात के वामपंथियों और क्षद्म बुद्धिजीवियों पहले अपना इतिहास तो देख लेते, तुमने मानवता का कितना विनाश किया है, कितनी हत्याएं और रक्तपात किया ये सभी जानते हैं , पूरे विश्व में तुम्हारा नामो निशान भी नहीं बचा , लेकिन फिर भी तुम्हारा घमंड नहीं गया , क्योंकि तुम्हे गाली और जूते खाने की आदत तो पड़ चुकी है , सच तुमसे सुना नहीं जाता और और तर्क के साथ बात करने की तुम्हारा विश्वसनीयता नहीं, बस देशविरोधी एजेंडा चलाते रहो, हमें तो रत्ती भर भी फर्क नहीं पड़ता, हमारा देश आगे बढ़ता रहेगा, तुम्हारे साथ भी और तुम्हारे बिना तो और भी अच्छा हो जायेगा , सुधर जाओ, नहीं तो जनता का दिमाग खराब हुआ, तो एक एक को धोती बचानी मुश्किल हो जाएगी, और वामपंथी ही क्यों जितने भी देश विरोधी हैं, चाहे वो किसी भी विचारधारा के हैं, उनका विनाश निश्चित है।

सरकार चाहे कोई भी हो अगर उसने देश के बहुसंख्य्क लोगों के साथ धोखेबाज़ी की तो उसके समूल नाश का दिन प्रारम्भ हो जाएगा , वर्त्तमान केंद्र सरकार को भी न जाने कौन सा नशा चढ़ गया , जो ये भी मुस्लिम तुष्टिकरण की तरफ कदम बढ़ा रहे हैं, अरे भैया तुम सांप को दूध पिलाओगे तो क्या वो तुम पर फूल बरसायेगा, हद है! ये कौन सा तर्क है कि नौजवान बेरोज़गारी की वजह से आतंकवादी बनता है, कश्मीरी पंडित तो 5 लाख थे जो अपने घर से खदेड़े गए मार दिए गए , क्या वो आतंकवादी बने, जितनी भी सरकारें अगर अपने देश के विस्थापित कश्मीरी पंडितों के बारे में नहीं सोच रही तो वो सरकार नपुसंक है, चाहे वो कोई भी हो, सिर्फ ये ही नहीं, भोपाल गैस त्रासदी , 1984 के नरसंहार पीड़ितों को इन्साफ, गोधरा में मारे गए रामसेवकों को न्याय, गुजरात दंगों के पीड़ितों को न्याय, जितनी भी नरसंहार हुए उनके दोषियों को फांसी से काम की कोई सजा न हो।

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