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माहौल ख़ौफज़दा है

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माहौल ख़ौफज़दा

माहौल ख़ौफज़दा है और आँखें हिकारत करती है
बेइंसाफी के दौर मे जब दुनिया नदारद रहती है

कोई शख्सियत यहाँ पाक साफ नहीं है
सबकी नीयत रिश्तों मे मिलावट करती है

कितना कुछ किया ऐ ज़िंदगी मैने तुझे समझने को
फिर भी तकदीर है कि मुझसे शिकायत करती है

मैं समझता था कि मेरी ज़हनियत मेरी ज़द में है
मगर ये तो दुनिया से खुलकर बगावत करती है

खून चलता है जब ग़ुलामी के पिंजरे जकड़ते हैं
और आज़ादी के लिए जवानी शहादत करती है

मामला अगर बात से सम्भले तो गनीमत है
वरना आवाम अपने हिसाब से हजामत करती है

दिलों में दर्द की बस्तियां और कितने शोले हैं
फिर भी दो बूँद अश्कों से तरावट रहती है

मेरे अक्स में कुछ तो खास रहा होगा यार
तभी तो दुनिया मुझसे अदावत करती है

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