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मेरी जीवन यात्रा

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मेरी जीवन यात्रा
मेरी जीवन यात्रा

दोस्तों मैं कुन्दन उर्फ जय आपको आज अपनी अभी तक की जीवन यात्रा के बारे में बताना चाहता हूं। मैं बिहार के मोतिहारी जिले के सिरौना गांव का मूल निवासी हूं। लगभग सभी सामान्य युवाओं की तरह मेरा भी सपना था कि मैं जीवन में कुछ ऐसा करूं कि मेरे साथ साथ परिवार समाज और राष्ट्र की प्रगति में मेरा योगदान हो। निम्न मध्यम वर्गीय परिवार की पृष्ठभूमि होने के कारण मेरे पास संसाधन और आर्थिक सहायता सीमित थी। इसलिए अपने सपनो से अधिक मैंने अपनी जिम्मेदारी, सही दिशा में परिश्रम, कुछ सीखने की ललक को महत्व दिया।
आज से ठीक 11 वर्ष पहले 21 जनवरी 2010 में मैं दिल्ली शहर आया था। BCA करने के बाद से मेरे मन में था कि अब पैसे कमाऊंगा। इंटरमीडिएट करने के बाद मैंने सोचा आगे ऐसी पढ़ाई की जाए जिसमे जल्द पैसे कमाने के अवसर मिलें। मेरे यहाँ के अधिकतर लोग कई वर्षों तक सरकारी नौकरी की तैयारी मोतिहारी, पटना रहकर करते है। मेरी भी बचपन में इच्छा थी कि मैं भी सरकारी नौकरी करूँ लेकिन घर की जरूरतों और जिम्मेवारियों ने मेरी इस इच्छा को दफन कर दिया। मैने सोचा किसी तरह एक टेक्निकल डिग्री के साथ स्नातक कर लूं..फिर कहीं प्राइवेट नौकरी करके पैसा कमाने लगूँगा। इसी सोच को ध्यान में रखके BCA में एडमिशन लिया और इसकी पढ़ाई पटना में रहकर 3 वर्षों में पूरी की।

BCA करने के बाद आगे नौकरी और डिस्टेंस से MCA की पढ़ाई के लिए मैं दिल्ली आया। 6 महीने का सर्टिफिकेशन कोर्स करने के लिए मैंने HCL CDC में दाखिला लिया..वहा हमारे साथ रेगुलर कॉलेज से MCA, B.tech किये छात्र भी सर्टिफिकेशन कर रहे थे। वे सारे छात्र अच्छे कॉलेजों से थे लेकिन कॉलेज प्लेसमेंट न होने के कारण वे लोग भी नौकरी के लिए दर-दर भटक रहे थे और अन्य कंपनियों में ‘walking vacancy’ पर निर्भर थे। BCA करने के बाद एक बार पापा बोले कि अच्छे कॉलेज से MCA कर लो फिर आगे अपनी जॉब देखना या हो सके कहीं कॉलेज से अच्छे कंपनी में प्लेसमेंट हो जाये। लेकिन B.Tech, MCA वाले जो मेरे साथी HCL CDC में सर्टिफिकेशन कर रहे थे उनके हालात देखकर मैंने निश्चय कर लिया कि पहले नौकरी करूँगा और साथ में डिस्टेन्स मोड से आगे की पढ़ाई करूँगा।

पहली नौकरी “Weblogics corporation” में जून 2010 में लगी..मेरी जॉब प्रोफाइल SEO executive (Search Engine Optimizer) थी। “SEO की परिभाषा सरल भाषा में, किसी वेबसाइट या ब्लॉग को सर्च इंजन जैसे Google, Bing आदि में शीर्ष स्थान पर रैंक करने के लिए किया गया कार्य है।” यह नौकरी मेरे रिश्ते के जीजा जी के रिफरेन्स से मिली। बचपन से ही पैसे कमाने के शौक थे..मात्र ₹4000 रुपये मासिक वेतन मिलने वाली यह नौकरी भी मेरे लिए कोई बड़े सपने पूरा होने जैसा था। वहां मैने करीब 10 महीने तक काम किया..Weblogics में मै ज्यादा कुछ सीख नही पा रहा था और मुझे अन्य काम का मौका भी नही मिल रहा था… आगे सीखने की ललक ने दूसरे कंपनी में इंटरव्यू देने के लिए विवश कर दिया।

साल 2011 की तस्वीर

Weblogics में साथ काम करने साथी वाले रवि जी के माध्यम से मेरी ऑनलाइन मुलाकात भागलपुर के रहने वाले सुजीत सर से हुई जो एक ट्रैवेल कंपनी “Go Heritage India Journey” में Sr. Web Analyst के पद पर कार्यरत थे। सुजीत सर की लेखनी बहुत शानदार है..वे एक से बढ़ एक हिन्दी कविता, आलेख लिखते है और अपने ब्लॉग पर पोस्ट करते है..उनकी ब्लॉग का मैं नियमित पाठक था और हमेशा उनसे हमारी Gtalk (जो अब hangout हो गया है) पर बातचीत होती थी। बातचीत के ही सिलसिले में मैंने अपनी जॉब प्रोफाइल के बारे में बताई.. चूंकि मैं उस टाइम जॉब सर्च भी कर रहा था..एक दिन उनके कहने पर उनके ऑफिस में इंटरव्यू के लिए गया और वहा मेरा सिलेक्शन हो गया। GHIJ में सुजीत सर के सानिध्य मुझे प्रोफेशनल और पर्सनल जीवन में बहुत कुछ सीखने को मिला। मै Search Engine Optimization के सारे एक्टिविटी को बहुत ही बारीकियों से जाना। लगभग डेढ़ साल GHIJ में काम करने के बाद मैं दूसरे कंपनियों में इंटरव्यू देने लगा।

SEO की सारी स्किल्स जानने के कारण मेरी जॉब “CSS Infotech” में Sr. SEO प्रोफाइल पर लगी। पहली बार किसी कंपनी में बतौर सीनियर के रूप में मेरी नियुक्ति 11 जून 2012 को हुई थी… खुशी इस बात की थी कि अब मै सीनियर हो गया..अब मेरी डायरेक्ट कंवर्सेसन क्लाइंट और डायरेक्टर से होगी..सीनियर का प्रेशर खत्म हो गया..अब जो भी अच्छे काम होगा उसका क्रेडिट हमें ही मिलेगा। लेकिन मन एक चिन्ता भी थी कि कैसे मैं इंडिपेंडेंट कामों को संभाल पाऊंगा..कही मै कंपनी के उम्मीदों पर खड़ा नही उतर पाया तो मेरी नौकरी पर भी खतरा बन जायेगा। उस वक़्त अपनी मनोदशा कुछ पंक्तियों के माध्यम से ब्लॉग पर शेयर किया था..जो निम्नलिखित है:

चल पड़े हैं  एक नयी मंजिल की ओर
उम्मीदों  का  संबल लिए  विश्वास  की  शक्ति के साथ
कोशिशों  के  सफ़र पर खुद को माझी  बनाकर
ये हम जानते है कि चुनौतिया बहुत आएगी
लेकिन मन ही मन तसल्ली देता खुद से कहता
हाँ मैं कर लूँगा  इन चुनौतियों का सामना
आखिर अपनी भी तो पहचान बनानी हैं!

इस कंपनी के लिए इंडिपेंडेंट रूप से सारे प्रोजेक्ट्स का प्रोमोशन करने लगा। इसी कंपनी में मेरी मुलाकात राजेश बलूनी से हुई। हम दोनों मिलकर इस कंपनी के बड़े प्रोजेक्ट्स जैसे C K Birla Group के Orient Fans, NBC Bearing, HIL आदि के लिए काम किए और इन वेबसाइट्स की रैंकिंग गूगल में शीर्ष स्थान पर लाये। राजेश के साथ हमारी बॉन्डिंग इतनी अच्छी रही कि हम दोनों एक सहकर्मी से ज्यादा भाई के जैसा रिश्ता हो गया। हम दोनों आपस में कोई विचार या दैनिक परेशानियों को साझा करते और उसका समाधान भी निकालते। हमारी मुलाकात 2012 में हुई लेकिन जैसा हमदोनो की विचारधारा है वैसे हमलोग आजीवन एक दूसरे के साथ जुड़े रहने वाले है। इसी बीच मार्च 2013 में मेरी बड़ी बहन की शादी के लिए घर आना हुआ..चूंकि घर में पापा के अलावा मैं ही सदस्य था जो शादी की सारी शॉपिंग और तैयारियां जैसे फर्नीचर बनवाना, टेंट बुक करना, तिलक लेकर जाने के लिए गाड़ी की व्यवस्था करना, घर की रंगाई पुताई करवाना आदि बड़े काम मेरे जिम्मे था। इसलिए मैं ऑफिस से 2 महीने की छुट्टी लेकर घर आ गया। बहन की शादी के बाद जब मैंने मई में वापस दिल्ली आकर कंपनी जॉइन की उस समय कंपनी में मुझे एक साल पूरे हो गए थे..अमूमन हरेक कंपनी अपने कर्मचारियों का एक साल पूरे होने पर वेतन की वृद्धि परफॉर्मेंस के हिसाब से करती है। लेकिन मेरी वेतन वृद्धि तो दूर की बात..कंपनी में अहमियत भी कम होने लगी थी। मुझे यह अंदाजा हो गया था कि अब मेरी जरूरत इस कंपनी को नही है। और एक दिन ऐसा आया कि मैनेजमेंट के तरफ से मुझे 15 दिन का नोटिस दे दिया गया। जैसा कि हाल में ही घर में शादी हुई थी तो जिसमें मैंने अपनी सारी सेविंग्स खर्च कर दी थी साथ ही कुछ पैसे पर्सनल लोन के रूप में बैंक से कर्ज लिया था जो हरेक महीने के तकरीबन ₹7000 का किश्त 3 साल के लिये चुकाना था। अब मेरे पास कुछ भी पैसे बचे नही थे..ऊपर से हरेक महीने का बैंक का कर्ज था..और मकान के रेंट , महीने के राशन सबके लिए नौकरी पर ही निर्भरता थी और मैं नोटिस पर चल रहा था। ऐसा संकट का समय जीवन में पहली बार आया था.. 

साल 2014 की तस्वीर

तभी Ashlar Tours कंपनी के तरफ से हमे इंटरव्यू के लिए बुलाया गया..उस कंपनी में मेरा एक दोस्त विवेक पाल वेब डिजाइनिंग पोस्ट पर कार्यरत था। 3 बार इंटरव्यू लेने के बाद मेरी नौकरी वहां हो गई.. यह मेरे लिए किसी ईश्वरीय चमत्कार से कम नही था। वेतन भी वर्तमान से सैलरी में 20% अधिक जोड़ के मिलने लगी। मैं प्राइवेट नौकरी के साथ साथ सरकारी नौकरियों के लिए भी आवेदन करता था। सरकारी नौकरी की अनेकों खाशियत में मुझे सबसे ज्यादा नौकरी की स्थायित्व पसंद है। एक बार सरकारी नौकरी लगने के बाद..नौकरी जाने का डर खत्म हो जाता है। लगभग 8 महीने तक Ashlar Tours में नौकरी करने बाद..मार्च में संविदा के तहत एक सरकारी नौकरी “इंदिरा आवास सहायक” के पोस्ट पर मेरी नियुक्ति गाँव के ही नजदीक के प्रखंड पकड़ी दयाल में हुई। मुझे धनौजी पंचायत मिला था।

इंदिरा आवास सहायक का कार्य वैसे ग्रामीण जो गरीबी रेखा के नीचे रहते है और जिनके पास अपना पक्का का मकान नही है..उनलोगों की सूची बनाकर आवास बनाने के लिए पैसे दिलाने होते है। इंदिरा आवास सहायक की उस समय मासिक वेतन लगभग ₹7000 थी..घर की जरूरतों ने इतने कम मासिक वेतन वाली नौकरी कुछ महीनों के बाद छोड़ने पर विवश कर दिया। फिर मैं कुछ महीनों बाद यह नौकरी छोड़कर वापस दिल्ली आ गया। 

साल 2015 की तस्वीर

दिल्ली आकर मैं SBeta Technology में लगभग 2.4 साल काम किया। इस कंपनी में मुझे 2 अच्छे एवं सच्चे मित्र आमिर और निगम सर का साथ मिला। जिनसे हमारी हमेशा बात होती है… प्रोफेशनल और पर्सनल लाइफ से जुड़ी समस्याओं का हल हम मिलके निकालते है। इसी बीच मेरी शादी मार्च, 2016 में हो गयी..अब घर गृहस्थी के खर्च और बढ़ गए…पहले मैं रूम शेयर करके रहता था तो किराया कम देना होता था..राशन के खर्च भी कम थे। शादी के बाद सारे खर्च दुगुना हो गए। लेकिन वेतन वृद्धि उस हिसाब से नही हो रही थी.. साथ ही मेरा प्रोफाइल सिर्फ SEO तक सीमित हो गया था। इसी कारण फिर से इंटरव्यू के दौर शुरू हो गया..तभी मेरा सेलेक्शन “Bent Chair” कंपनी में हुआ। पहली बार मुझे “In-house eCommerce” प्रोजेक्ट पर काम करने का मौका मिला।  यहां पर मैने डिजिटल मार्केटिंग सारे चैनल जैसे Facebook Ads, Google Ads, Marketing Automation Scenario, Email Marketing, SMS Marketing, Affiliate Marketing, Search Engine Optimization, और Social Media Optimization को अच्छे से जाना और सीखा। कंपनी में पेड एड्स के लिए बजट का कोई लिमिटेशन नही था..हमें किसी भी प्लेटफॉर्म पर खर्च करने की आजादी थी। Bent Chair में मैंने लगभग 3 साल तक काम किया यहां पर मुझे 2 अच्छे दोस्त जगदीश और निखिल मिले..जिनसे मैं हमेशा संपर्क में रहता हूँ। 

साल 2018 की तस्वीर

साल 2019 में फायर सेफ्टी मैन्युफैक्चरिंग की बहुप्रसिद्ध कंपनी “Mitras Technocrafts” जॉइन किया। अब तक तो मेरे प्रोफाइल में डिजिटल मार्केटिंग के सारे स्किल्स जुड़ ही गए थे। अब मुझे eCommerce Marketplaces के बारे में जानने का अवसर मिला। इस कंपनी का मुख्य रेवेन्यू सौर्स Amazon, Flipkart था। यहाँ मेरी प्रोफाइल “Digital Marketing cum eCommerce Manager” हो गयी। जब देश में Lockdown लगा तो कुछ दिन तक इस ऑफिस का कार्य घर से करने की अनुमति मिली..लेकिन कुछ दिनों के बाद मैनेजमेंट के तरफ से ऑफिस आकर काम करने का आदेश आने लगा। चूकिं उस समय मेट्रो नही चल रही थी..बस भी सिर्फ 20 यात्रियों के साथ सफर कर रही थी। इस कारण मुझे प्रतिदिन ऑफिस आकर काम करना मुश्किल हो रहा था। ऑफिस न आने के कारण मुझे मानसिक दवाब झेलना पड़ रहा था..फिर मैं एक दिन तंग आकर Mitras Technocrafts से रिजाइन दे दिया। हालाँकि कोरोना जैसे महामारी के समय लगभग सभी देश भयंकर बेरोजगारी की समस्या से जूझ रहे थे.. उस समय यह कदम उठाना मेरे लिए बहुत ही कठिन और चुनौती पूर्ण था। मैं घर से डिजिटल मार्केटिंग का काम कुछ क्लाइंट्स के लिए फ्रीलांस के तौर पर करता हूँ..उस समय सोचा कि अभी Survival के लिए कुछ काम है ही..फिर मैं आगे इंटरव्यू देकर दूसरी कंपनी जॉइन कर लूंगा। ईश्वर की कृपा से हुआ भी ऐसे ही। Mitras का 2 महीने का नोटिस सर्व ही कर रहा था कि इसी बीच और अन्य 4 कंपनियों में मेरा सेलेक्शन हो गया। 

साल 2019 की तस्वीर

सितंबर, 2020 में मैंने “Nappa Dori” कंपनी जॉइन कर लिया। यह कंपनी लेदर गुड्स बनाती है। इसके अपने स्टोर लंदन सहित भारत में 8 जगह है। इस ब्रांड को लोग जेन्युइन और हैंडक्राफ्टेड लेदर गुड्स के तौर पर जानते है।

दोस्तों, जीवन के कुछ महत्वपूर्ण कार्य इसी दिल्ली में रहके परिश्रम के बदौलत पुरें हुए है। कुछ और कार्य निपटाने बाकी है जिसके लिए संघर्ष जारी है…

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