Home ग्रामीण जीवन सिरौना: भारतीय स्वतंत्रता के इतिहास से जुड़ा एक अनूठा गाँव

सिरौना: भारतीय स्वतंत्रता के इतिहास से जुड़ा एक अनूठा गाँव

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Sirauna

बिहार के पूर्वी चम्पारण जिले का एक छोटा सा मनभावन गाँव सिरौना जहाँ ग्रामीण क्षेत्र की सौम्यता और सादे जीवन की रमणीयता अपने आप में एक मिसाल है। चम्पारण जिले का इतिहास तो सभी जानते हैं और इसका बहुत गहरा सम्बन्घ गाँधी जी से भी था और आपलोग चम्पारण सत्याग्रह आंदोलन के बारे में पढ़ा ही होगा कि जब भारत अंग्रेजों का ग़ुलाम था तो अंग्रेजों द्वारा किसानो से नील की खेती जबरदस्ती करवाई जाती थी, और उनसे मनमाना टैक्स वसूला जाता था। सिरौना गाँव के बारे में प्रसिद्द है की ये गाँव कभी अंग्रेजों का ग़ुलाम नहीं रहा या यूँ कह्रें की इस गाँव पर अंग्रेजो की बुरी नज़र लगने से ये बच गया। नील की खेती से जब चम्पारण के सभी किसान त्रस्त और बहुत परेशान थे तब आप ये जानकार हैरान हो जाएंगे की सिरौना जैसे गाँव के किसानों से अंग्रेज नील की खेती नहीं करवा पाए थे और ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि यहाँ के किसानो ने एक बहुत ज़बरदस्त युक्ति से अपने आपको नील की खेती करवाने से बचा लिया था। यहाँ के किसान नील के बीज को रातो रात आग पे भून देते थे और जब भुना हुआ बीज खेतो में बोते वो अंकुरित नहीं हो पाता। अंग्रेज को लगता कि यहाँ की भूमि नील की खेती के लिए उपयुक्त नहीं है। इस कारण यहाँ कभी भी नील की खेती नहीं हुयी और किसान अंग्रेजो के ग़ुलाम नहीं हुए। इस गाँव का भारत की स्वतंत्रता में भी बहुत बड़ा योगदान है।
इस गाँव के स्वतंत्रता सेनानियों के नाम निम्नलिखित हैं:

ताम्रपात्रधारी
1. स्व0 ब्रज बिहारी शर्मा
2. स्व0 राम बिहारी शर्मा
3. स्व0 रूपनारायण सिंह
4. स्व0 रामजी प्रसाद
5. स्व0 धनेश्वर सिंह
6. स्व0 सुवंश प्रसाद
7. स्व0 राम विलास प्रसाद
8. स्व0 तपी सिंह

गैर ताम्रपात्रधारी
1. स्व0 सरयू शर्मा
2. स्व0 बिजली शर्मा
3. स्व0 गजेंद्र शर्मा
4. स्व0 कैलाश लाल
5. स्व0 नथुनी सिंह

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