रूह से रूबरू

यूं किसकी फिराक में रहता है दिल
रूह से रूबरू होता तो बाहर नहीं भटकता

तेरा घूंघट चेहरे की हिफाज़त करता है
बहुत कोशिशों पर भी नीचे नहीं सरकता

चट्टानी इरादों से मजिलें पास आ जाती हैं
करने की ज़िद हो तो काम नहीं लटकता

रुकता वही है जिसके पैर लड़खड़ा जाएं
अपना मंसूबा तो कभी ऐसे नहीं अटकता

खुद के हाथों से अपनी दास्तां लिखो यारों
ताने देता है ज़माना मगर तुमको नहीं समझता

जब हमकदम साथ छोड़े तो तकलीफ होती है
औरों की बदमिजाजी से दिल नहीं अखरता

वो शुरुआत नहीं करते और तुम भी नहीं झुकते
गुरूर से कभी कोई मसला नहीं सुलझता

खुशनसीब हो कि तुम खुदा की जद में आ गए
वक्त ऐसे ही किसी को बेवजह नहीं परखता

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admin

सांझी बात एक विमर्श बूटी है जीवन के विभिन्न आयामों और परिस्थितियों की। अवलोकन कीजिए, मंथन कीजिए और रस लीजिए वृहत्तर अनुभवों का अपने आस पास।

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