चालबाज़ी

सच को झूठ का नकाब हैं पहनाते
लोग सफाई से झूठ बोल जाते

माना कि मेरा मिज़ाज गर्म है बहुत
खुराफाती दिमाग हम नहीं चला पातें

काश कि थोड़ी सी अक्ल मेरे पास होती
तो इतना बुरा अपने को नहीं दिखाते

कमियां बहुत है मुझमे ये जानता हूँ मैं
पर मक्कारी के रास्ते पर नहीं जाते हैं

हमसफ़र अपनी चालबाज़ी से बच गया
हम अपनी साफगोई से सबको दुश्मन बनाते

कितना समझाया था कि होश मत खोना
और दूसरों के उकसाने पर इतना झल्लाते

हैरान हूँ कि इतने शातिराना अंदाज़ हैं उनके
हमारे भोलेपन को वो पल में रौंद जाते

सिर्फ लिखना और कहानी बनाना
इसके सिवा हम कुछ नहीं कर पाते

अब सोचते हैं इरादों में मज़बूती लाएं
सिर्फ सच की पूँजी से ज़िन्दगी सजाते

फायदा तो नहीं है इतना लिखकर भी
बस थोड़ी सी मन की तसल्ली कर जाते

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सांझी बात एक विमर्श बूटी है जीवन के विभिन्न आयामों और परिस्थितियों की। अवलोकन कीजिए, मंथन कीजिए और रस लीजिए वृहत्तर अनुभवों का अपने आस पास।

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