दिलों में इरादों की मशाल लेकर चलता हूं

Happy man

कभी अपनी धुन में कभी बेपरवाह रहता हूं
मैं परिंदों सा उड़ने का हौसला रखता हूं

मुझे यकीन है कि कई लोग बड़े परेशान हैं
मैं बस अपने रास्तों को तैयार करता हूं

कौन क्या कहता है इसके कोई मायने नहीं
साथ कौन देगा इसकी परवाह करता हूं

ज़मीन पर सूखे तिनके घास से बिखर गए
मैं उनकी बागबानी भी बड़े करीने से करता हूं

जिंदगी में तो कई मसलों की भरमार है
मैं इन बेकार मुद्दों में नहीं उलझता हूं

साफगोई आजकल नदारद रहती है
पर मैं अपनी बातों को बेबाक रखता हूं

जुबान में मिश्री नहीं तो ज़हर मत उगलो
बोली की कीमत को अच्छे से समझता हूं

खौफजदा मंजरों की किसको परवाह है
दिलों में इरादों की मशाल लेकर चलता हूं

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सांझी बात एक विमर्श बूटी है जीवन के विभिन्न आयामों और परिस्थितियों की। अवलोकन कीजिए, मंथन कीजिए और रस लीजिए वृहत्तर अनुभवों का अपने आस पास।

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