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इतना ही कहना है तुझसे मेरी माँ

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Mother and Son
इतना ही कहना है तुझसे मेरी माँ

अपने हुनर और मेहनत की बदौलत सब कुछ पाउँगा
एक दिन अपने इरादों में ज़रूर कामयाब हो जाऊंगा

जिन्हे ग़लतफ़हमी है कि मैं नालायक हूँ
अपनी कामयाबी से मैं लायक बन जाऊंगा

ठोकर और दर्द तो ज़िन्दगी का हिस्सा है
अपने हिस्से के दर्द से खुशियां खींच लाऊंगा

कितने ही लोग मुझे गिराने को तैयार हैं
मैं उनके तानो को सीढ़ी बनाकर चढ़ जाऊंगा

अभी मैं ज़ख़्मी हूँ तो क्या हुआ यारों
अपने इरादों के मरहम से सरपट दौड़ जाऊंगा

आज जो लोग मेरी खिल्ली उड़ाते हैं
कल उन्ही की तालियों से गूँज जाऊंगा

वो कहते हैं कि तुझे बोलना नहीं आता
मैं कहता हूँ कि मैं दुनिया का शोर बन जाऊंगा

मैं एक दिन सफलता कि बुलंदी पर चढ़ जाऊंगा
और माँ के चरणों की धूल को माथे से लगाऊंगा