मिलता नहीं है यारों मंज़िल का निशां

Ficus tree

मिलता नहीं है यारों मंज़िल का निशां
कहाँ पर आसमान और ज़मीन होते हैं

फुर्सत नहीं है ज़िन्दगी में, लेकिन झमेला है
वक़्त के तेवर भी बड़े महीन होते हैं

सूखा और बदरंग तो नहीं है खैर
खुशफहमी के मंज़र भी रंगीन होते हैं

आसान मत समझना ज़िन्दगी के फलसफे को
इसके इरादे भी बड़े संगीन होते हैं

कोई वजह ज़रूर है कि रब इम्तिहान ले रहा है
उसके फैसले हमेशा बेहतरीन होते हैं

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सांझी बात एक विमर्श बूटी है जीवन के विभिन्न आयामों और परिस्थितियों की। अवलोकन कीजिए, मंथन कीजिए और रस लीजिए वृहत्तर अनुभवों का अपने आस पास।

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