खोज ले एक नए लक्ष्य को अपने मन में

मुश्किलों से भरी राहों को पार करके
दृढ संकल्प की सीमा को तैयार करके
गतिशील क़दमों से कर धरती का मूल्यांकन
अब छोड़ दे अपना ये व्यर्थ रुपित क्रन्दन
सदुपयोग कर स्वर्णिम समय का अपने जीवन में
खोज ले एक नए लक्ष्य को अपने मन में

तेरी हर राहों में आएंगे भीषण काटें
पर तेरी चरणकमल उसमे विजयपुष्प छाटें
आए धूलों का बवंडर या विपदाओं का तूफान
बस चलते जाना और बढ़ते जाना ही है तेरी शान
तोड़ कर सपनों के तारे ला हकीकत के गगन में
खोज ले एक नए लक्ष्य को अपने मन में

नहीं त्याग जिजीविषा को हो जा अब जीवंत
तेरे दुर्भाग्य का अब होने ही वाला है अंत
सूर्य की उज्जवल किरन से डर रहा देखो तिमिर
कर ले तू सम्मान आज ऊँचा सिर
सांस ले तू अब नई निर्मल पवन में
खोज ले एक नए लक्ष्य को अपने मन में

चीरकर पर्वत को आगे बढ़ेगा शौर्य
शक्ति से संपन्न होगा अब तेरे ह्रदय का धैर्य
नग्न पावों से अंगार शय्या पर चलना है
चहूँ ओर अब विजय गूंज को बजना है
कोमल कलिया खिलानी है तुझे उपवन में
खोज ले एक नए लक्ष्य को अपने मन में

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सांझी बात एक विमर्श बूटी है जीवन के विभिन्न आयामों और परिस्थितियों की। अवलोकन कीजिए, मंथन कीजिए और रस लीजिए वृहत्तर अनुभवों का अपने आस पास।

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