साहित्य कोई शिकन भी माथे पर ठहरती नहीं May 3, 2019 कोई शिकन भी माथे पर ठहरती नहीं कभी तो कोई दाग दामन पर रहा होगा चाँद तो सड़क पर गर्ममिज़ाजी
साहित्य मिरे तकिये मे कई रातें बिखरती हैं May 3, 2019 मिरे तकिये मे कई रातें बिखरती हैं लब ग़ुलाम हैं और शिकायतें सुलगती है पूरे चाकचौबंद से हिफ़ाज़त का मुआईना