साहित्य मिरे तकिये मे कई रातें बिखरती हैं May 3, 2019 मिरे तकिये मे कई रातें बिखरती हैं लब ग़ुलाम हैं और शिकायतें सुलगती है पूरे चाकचौबंद से हिफ़ाज़त का मुआईना