बिना श्रेणी वामपंथ की मरणासन्न पत्रकारिता May 24, 2019 पत्रकारिता में स्वयंभू शिखर पुरुष कहलाने हेतु रविश कुमार की मानसिकता एक ऐसे कुंठित व्यक्ति की तरह हो चुकी है
साहित्य कोई शिकन भी माथे पर ठहरती नहीं May 3, 2019 कोई शिकन भी माथे पर ठहरती नहीं कभी तो कोई दाग दामन पर रहा होगा चाँद तो सड़क पर गर्ममिज़ाजी
साहित्य मिरे तकिये मे कई रातें बिखरती हैं May 3, 2019 मिरे तकिये मे कई रातें बिखरती हैं लब ग़ुलाम हैं और शिकायतें सुलगती है पूरे चाकचौबंद से हिफ़ाज़त का मुआईना