इस ज़माने की गर्द से हीरा तराशा है
इस ज़माने की गर्द से हीरा तराशा है एक तेरी रूह सच है बाकी सब
इस ज़माने की गर्द से हीरा तराशा है एक तेरी रूह सच है बाकी सब
कोई शिकन भी माथे पर ठहरती नहीं कभी तो कोई दाग दामन पर रहा होगा
मिरे तकिये मे कई रातें बिखरती हैं लब ग़ुलाम हैं और शिकायतें सुलगती है पूरे