संभलना जरा उस से नजरें बचाकर

संभलना जरा उस से नजरें बचाकर
कहीं बेवकूफ ना बना दे खूबसूरती दिखा कर

आंखों ने बहुत धोखे दिए हैं मेहरबान
कभी नजरें मिलाकर कभी नजरें झुकाकर

बस दूर से ही उसको प्रणाम करना भाई
वरना कहीं का नहीं छोड़ेगी जाल में फंसाकर

वो मुस्कुराहट तो तबियत से जहर मालूम होती है
नालायक बना देगी तुम्हे वो थोड़ा सा मुस्कुराकर

अगर एक बार जेब से पैसा उड़ा दिया तुमने
भरेगी नहीं नीयत फिर भी सारी कमाई लुटाकर

आज़ादी तो पहली मुलाकात में ही जमींदोज होगी
रही सही कसर पूरी होगी अपना गुलाम बनाकर

बेशक शादी की मिठाई बहुत मीठी है यारों
शुगर लेवल न बढ़ जाए कहीं थोड़ा सा खाकर

कुछ तुम्हारा नहीं रहता सिर्फ माफी मांगने के सिवा
गलत न होने पर भी रहते हैं मर्द नजरें झुकाकर

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सांझी बात एक विमर्श बूटी है जीवन के विभिन्न आयामों और परिस्थितियों की। अवलोकन कीजिए, मंथन कीजिए और रस लीजिए वृहत्तर अनुभवों का अपने आस पास।

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