वो रास्ते, वो मंजिले, वो मुक़द्दर कहाँ
वो रास्ते, वो मंजिले, वो मुक़द्दर कहाँ, पहले जैसे अब कोई काफिले कहाँ, वो नूर,
वो रास्ते, वो मंजिले, वो मुक़द्दर कहाँ, पहले जैसे अब कोई काफिले कहाँ, वो नूर,
पश्चिम बंगाल के कोलकाता में स्थित एक छोटे गाँव अहिरीटोला में अजीत नाम का एक
पुराने दिनों में जहाँ यादें बसती हैं, जहां अतीत की फुसफुसाहट हमेशा के लिए सरक
तेजी से वैश्वीकरण और सांस्कृतिक आदान-प्रदान की विशेषता वाले युग में, वैदिक सनातन धर्म, इसके
जीवन की भी क्या विडंबना है कि काम और रोजगार के लिए आदमी को अपनी
ये इश्क़ भी बड़ा अजीब है जो दिल से दूर है उसके करीब है वो
आज का भारत जहाँ विश्व को रास्ता दिखा रहा है और नए – नए कीर्तिमान