चिंगारी तभी सुलगती है जब हवा का साथ हो

Burning matchstick

चिंगारी तभी सुलगती है जब हवा का साथ हो
आग तभी लगती है जब धुआँ आस पास हो

समंदर का वजूद भी उस नदी पर टिका है
जिसके पास तेज़ और बहती धार हो

यहाँ लोगों की ज़िन्दगी में सैकड़ो परेशानी है
और उस पर हंसनेवालो तुम भी कमाल हो

मज़ाक एक दायरे में ही सटीक बैठते है
बेबात में ठहाके लगाना तो जैसे कोई बवाल हो

तुम्हे दर्द होगा तो जानोगे हमारी तकलीफ
ईश्वर करे तुमको भी इसका जल्दी एहसास हो

हो सके तो ज़ुबान से अच्छी बात ही बोलना
ताकि हर किसी को सुनने का लिहाज़ हो

लहजा अगर बेतरतीब है तो सुधारो
वरना तो फिर अपना काम बिगाड़ लो

हो सके तो इसको ज्ञान नहीं अनुभव समझना
मैं नहीं चाहता की तुमको बाद में मलाल हो

About the Author

admin

सांझी बात एक विमर्श बूटी है जीवन के विभिन्न आयामों और परिस्थितियों की। अवलोकन कीजिए, मंथन कीजिए और रस लीजिए वृहत्तर अनुभवों का अपने आस पास।

You may also like these