मैं कहानी कहना चाहता हूं

मैं दूर गई यादों की झांकी को बताना चाहता हूं
मैं कहानी कहना चाहता हूं

शहर भी अपनी मौज मस्ती में मगन है
मैं कुरेद कर उनको जगाना चाहता हूं

क्या हुआ जो दर्द का दायरा बढ़ रहा है
उसको अपनी संवेदना से घटाना चाहता हूं

मौके मिले तो गधा भी यहां पर सियार होता है
मैं शेर का मुखौटा हटाना चाहता हूं

बदइंतजामी तो मेरे घर में कब से रही है
मैं ठोकरों से सीढियां बनाना चाहता हूं

दावा है कि मै तो बड़ा मशहूर हूं
इस गलतफहमी को जल्दी से मिटाना चाहता हूं

अपने ही करम है जो साथ रहते हैं
सबको यही बताना चाहता हूं

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सांझी बात एक विमर्श बूटी है जीवन के विभिन्न आयामों और परिस्थितियों की। अवलोकन कीजिए, मंथन कीजिए और रस लीजिए वृहत्तर अनुभवों का अपने आस पास।

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