ज़िन्दगी खुलकर जिया जाए

मौत की दस्तक का ऐसा है आलम
कि फूली हुई सांस का जायजा लिया जाए।

कहानी बेलौस है कि छूटती नहीं
दो घड़ी बैठकर इसको सुना जाए।

एक अखबार की कतरन में बड़ी खबरें
चलो कुछ देर इनको भी पढ़ा जाए।

उधेड़बुन में लगी हुई ज़िन्दगी इस तरह
की बिखरे हुए ख्वाबों को बुन लिया जाए।

मैं चुपचाप धरती के बर्दाश्त को देखता हूं
कभी तो इसका भी दर्द बांटा जाए।

क्या ताल्लुकात है अंधेरों के आसमान से
ज़रा बुझते हुए दियों को जलाया जाए।

कौन मौत के खौफ में रहता है यहां
जितनी मिली है ज़िन्दगी खुलकर जिया जाए।

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सांझी बात एक विमर्श बूटी है जीवन के विभिन्न आयामों और परिस्थितियों की। अवलोकन कीजिए, मंथन कीजिए और रस लीजिए वृहत्तर अनुभवों का अपने आस पास।

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