अरविंद केजरीवाल: भारतीय इतिहास का सबसे शातिर, धूर्त और निकम्मा नेता
कहते हैं कि शर्म को अगर बेचकर पैसे मिले तो बेशर्म और ग़ैर ज़िम्मेदार व्यक्ति
कहते हैं कि शर्म को अगर बेचकर पैसे मिले तो बेशर्म और ग़ैर ज़िम्मेदार व्यक्ति
प्रत्येक व्यक्ति जब वो अपने बचपन को जी रहा होता है उस के लिए उमंग-उत्साह
मैं झूठे आरोपों और बरगलाने के लिए आता हूँ मैं खानदानी डकैतों को किसान बताता
जिस व्यक्ति के अंदर दृढ़ इच्छा शक्ति पैदा हो जाती है वह कठिन से कठिन
ये क्या प्रतिकूल परिस्थितियां है मेरे जीवन में, कहीं भी स्वतंत्रता का भान नहीं, बस
सरकार की तरफ से किसानों को लिखित गारंटी देने का भरोसा दिया गया है कि
छोटे शहरों, गाँवो और कस्बों से आए हुए लोग… न जाने कितने अरमानो का भारी