धड़कने बयां करती है ज़िन्दगी की किश्तें

Man silhouette on beautiful sunset

धड़कने बयां करती है ज़िन्दगी की किश्तें
सांसों का गुच्छा अब टूट रहा है

आगजनी होती है सोच में सभी के
गुस्सा अब बेधड़क फूट रहा है

जो लम्बी दीवारों के महलों में थे
उनका गुरूर भी टूट रहा है

किए होंगे कारनामे तभी नाम आया
लगता है रुआब भी अब छूट रहा है

शोर के बाजार में मौन जैसे मर गया
और आवाज़ का दुकानदार हमें लूट रहा है

जज़्बात भी सयाने हो गए हैं इस तरह
तीखी नज़रों से दिल मुझे घूर रहा है

खिलाफ नहीं था बस कुछ अलग था मैं
मुझमे भी सच और झूठ रहा है

बुलंदी पर पहुंच कर करता भी क्या
ज़िन्दगी का मसला तो रूठ रहा है

जिनकी रहबरी में ज़िन्दगी बीती है
उन्ही से मेरा दिल पूछ रहा है

शरीर पास है मगर रूह भटकती है
एहसासों का मंजर भी दूर रहा है

यादों का क्या है जिंदा रहेंगी
पर किस्सा क्यों अपना वो भूल रहा है

भीगे हुए दामन में कभी बूंदें सिमटी थी
अब तो अश्क का दरिया भी सूख रहा है

शायद दो पल का सुकून मिले
पुलिंदा अब नब्जों का फूल रहा है

कठिन शब्द और उनके अर्थ:
रहबरी: मार्गदर्शन
रुआब: दबदबा
पुलिंदा: काग़ज़, कपड़े आदि की बँधी गठरी
जज़्बात: भावना
मसला: समस्या, मुद्दा, मामला

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सांझी बात एक विमर्श बूटी है जीवन के विभिन्न आयामों और परिस्थितियों की। अवलोकन कीजिए, मंथन कीजिए और रस लीजिए वृहत्तर अनुभवों का अपने आस पास।

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