भारतीय राजनीति में विपक्ष की स्थिति

Lal Krishna Advani and Narendra Modi

विपक्ष मुद्दा विहीन है और प्रधानमंत्री की पिच पर बैटिंग करने को मजबूर है मगर दुर्भाग्य से विपक्ष हमेशा से शून्य पर आउट हो रहा है। कांग्रेस और वामपंथियों के दलाल और खलिहर पत्रकार अब कुंठा से मरे जा रहे हैं विगत कुछ दिनों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत की कुछ महान विभूतियों को भारत रत्न देने की घोषणा जब से की है विपक्ष के लिए न उगलने और न निगलने वाली स्थिति हो गयी है।

सबसे पहला वार विपक्ष के लिए घातक सिद्ध हुआ जब मोदी सरकार ने उचित मायने में सच्चे समाजवादी और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जननायक आदरणीय कर्पूरी ठाकुर को भारत रत्न देने की जब घोषणा हुई तो विपक्ष के सर पर आसमान गिर पड़ा और उसको अपनी ज़मीन भी बचाने के लिए कुछ सूझता नहीं दिखा। राजनीतिक पाखंड का आप इसी से अंदाजा लगा सकते हैं कि जिन कर्पूरी ठाकुर की सजायाफ्ता लालू प्रसाद यादव ने जीवन पर्यन्त हमेशा अपमान किया और सदा ही उनको ओछे नामो से पुकारा (जिसका ज़िक्र यहाँ करना मुनासिब नहीं है ) उन्ही को भारत रत्न देने की घोषणा जब हुई तो ये लोग बिलों में घुसे हुए साँपों की तरह कहने लगे की हम तो कब से उनको भारत रत्न देने की मांग कर रहे थे।

समाजवाद का झंडा बुलंद करने वाले जननायक को उचित सम्मान देकर प्रधानमंत्री मोदी ने नकली समाजवादी के मुँह पर एक करारा तमाचा मारा है जिसकी गूँज में एक अजीब से ख़ामोशी है। कांग्रेस तो वैसे भी मृत्युशय्या पर है उस से नैतिकता की उम्मीद करना बेमानी है। कर्पूरी ठाकुर को भारत रत्न देने का समाचार विपक्ष ने किसी तरह पचा दिया था लेकिन फिर नरेंद्र मोदी ने भारत के पूर्व उप प्रधानमंत्री, राम मंदिर आंदोलन के नायक और भाजपा के वरिष्ठ नेता आदरणीय लाल कृष्ण आडवाणी को भी भारत रत्न देने की घोषणा से विपक्ष पर तो जैसे वज्रपात हो गया। इतना क्या कम था की प्रधानमंत्री मोदी ने भारत के पूर्व प्रधानमंत्री और किसान नेता दिवंगत और आदरणीय चौधरी चरण सिंह को भी भारत रत्न देने की घोषणा कर दी।

विपक्ष के दांत अब खट्टे हो चुके हैं क्योंकि किसानो के नाम पर राजनीती करने वाला विपक्ष जिसने हमेशा देश के गरीब वर्ग को हमेशा ठगा ही है। किसानो का हितैषी बनने का नाटक करने वाली देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस ने तो घमंड और पाखंड में उच्च स्तर की डिग्री ले रखी है। जिन स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू करने का पूरा अवसर कांग्रेस के पास था वर्ष 2004 से 2014 के बीच उसने वो लागू नहीं किया तो आप सोच सकते हैं कि कांग्रेस किस मानसिकता वाली पार्टी है। कांग्रेस कितना किसानो का हित सोचती है ये इसी बात से पता चलता है कि स्वामीनाथन और चौधरी चरण सिंह जैसे महान विभूतियों की हमेशा उपेक्षा की। अब जब केंद्र में मोदी सरकार इन महान लोगों का सम्मान कर रही है तो उसमे भी कांग्रेस और घमंडिया गठबंधन के पेट में मरोड़ पड़ रहा है। कोई बात नहीं ये मरोड़ और खिसियाहट बचाकर रखनी चाहिए कांग्रेस और पूरे विपक्ष को क्योंकि अभी और झटके लगने बाकी हैं।

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