गहरी काली रात अपने दायरे
को बढ़ा रही है
और उसमें सूनापन और अधिक
बढ़ता जा रहा है,
रातें और सुनसान रास्तों
की आपस में दोस्ती हो गई है,
मगर ये गहरा, मटमैला और काजल से भी
काला अंधेरा अपने साथ जानलेवा
लहरों को लाया है।
पथरीले रास्ते एड़ियों से जब टकराते
हैं तो पूरा पांव सुन्न हो जाता है,
हवाएं जोर से चलने लगती है और कांच
की तरह पूरे शरीर पर चुभती है।
ऐसे माहौल में मेरे पास शरीर पर
ठंडे कपड़ों के अलावा कोई सहारा नहीं है,
मैं धूप का बेसब्री से इंतजार कर रहा हूँ,
लेकिन ऐसा प्रतीत होता है कि सूरज की प्रथम किरण
के आगमन से पहले, मेरे जीवन की ज्योति
ये कड़कड़ाती सर्दी न बुझा दे।