छोटे शहरों, गाँवो और कस्बों से आए हुए लोग
छोटे शहरों, गाँवो और कस्बों से आए हुए लोग… न जाने कितने अरमानो का भारी
छोटे शहरों, गाँवो और कस्बों से आए हुए लोग… न जाने कितने अरमानो का भारी
मोतिहारी जिले का एक मनोरम गाँव “सिरौना” जिसका अपना एक इतिहास है। कभी इतिहास के
सूखे हुए उजाले अब अँधेरे हो गए दीवारों पर रेंगती हुई ज़िंदगी की खातिर कुछ
दिल एक सुकून की तलाश में रहता है अपना हाल-ए-दिल सबसे कहता है पांव टिकते
टूटी हुई शाखें दरख़्त के मायने तलाशती हैं बिखरी हुई पत्तियां मिटटी के घरोंदे सजाती
इस छोर पर ज़िन्दगी खड़ी है कई इरादे दिल में लिए सुस्ती का कुछ ऐसा
पहले लगता था कि कोई नाराज़ है यकीन मानो अब कोई फर्क नहीं पड़ता। दिल
उठ! क्यों हो रहा है निराश अब मत हो तू इतना हताश जीवन अभी बहुत
राम मन में हैं मेरे राम जीवन हैं मेरे राम की महिमा निराली राम नस