ज़िन्दगी खुलकर जिया जाए
मौत की दस्तक का ऐसा है आलम कि फूली हुई सांस का जायजा लिया जाए।
मौत की दस्तक का ऐसा है आलम कि फूली हुई सांस का जायजा लिया जाए।
मैं दूर गई यादों की झांकी को बताना चाहता हूं मैं कहानी कहना चाहता हूं
कभी कुछ सोंचूं तो याद बह जाती है मेरे सिरहाने में आने से नींद कतराती
ये धूप चटक होती है यूं सर्द गरम होती है अब शाम की फुहारों में
Lockdown में सभी व्यक्तियों को घर मे रहना है और कोरोना महामारी को भारत से
बिखरा – बिखरा सब हिल गया है टुकड़ा टुकड़ा मेरा दिल हुआ है सपनो के
कुछ अधपकी उम्मीदों को हथेली में रखकर आया है इस गली में कोई इतने दिनों
मेरी आवाज दरिया में खो सी गई है अँधेरे में रोशनी भी सो सी गई
बहुत दिनों बाद मिला अपनी कविता से, उससे वार्तालाप हुई तत्पश्चात उसको मन के सूक्ष्म