बिखरा – बिखरा सब हिल गया है
बिखरा – बिखरा सब हिल गया है टुकड़ा टुकड़ा मेरा दिल हुआ है सपनो के
बिखरा – बिखरा सब हिल गया है टुकड़ा टुकड़ा मेरा दिल हुआ है सपनो के
कुछ अधपकी उम्मीदों को हथेली में रखकर आया है इस गली में कोई इतने दिनों
मेरी आवाज दरिया में खो सी गई है अँधेरे में रोशनी भी सो सी गई
तू कहती है कि मैं तेरा ख्वाब हूँ फिर क्यों तू मुझे हकीकत में नहीं
एक स्याह को तरसते वो कुछ कह नहीं पाए कुछ सुर्ख लाली लगने को थी
मैं टूट नहीं सकता घनघोर पीडाओं का जाल मुझे फँसा रहा है अथाह प्रसन्नता मेरे
मुझे इल्म नहीं है कि तू मुझसे नाराज़ है शायद तेरे गुस्से का यही आगाज़