मेरा चाँद
रात्रि कोष से निकला एक अप्रतिम उपहार जाने किस सहजता में अपनी शीतलता का पूरे
व्यक्ति का हृदय व्याकुल है, प्रेम में धोखा, विश्वासघात के कारण उसके हृदय से ये
रोज सुबह घर से बेमन निकलता हूं गाड़ियों के धुएं और धूप में झुलसता हूं
दिल के कोने में कुछ एहसास आज भी बाकी है कुछ ख्वाबों के मुकम्मल होने
मिली है जो ज़िन्दगी बहुत खूबसूरत है, ख्वाहिशों से भरी हमारे दिल की मासूमियत है,
सपनो का एक अलग मुकाम होगा तेरी ज़िंदगी मे नया आसमान होगा कौन होगा जो
वो रास्ते, वो मंजिले, वो मुक़द्दर कहाँ, पहले जैसे अब कोई काफिले कहाँ, वो नूर,
पुराने दिनों में जहाँ यादें बसती हैं, जहां अतीत की फुसफुसाहट हमेशा के लिए सरक