दिलों में इरादों की मशाल लेकर चलता हूं
कभी अपनी धुन में कभी बेपरवाह रहता हूं मैं परिंदों सा उड़ने का हौसला रखता
कभी अपनी धुन में कभी बेपरवाह रहता हूं मैं परिंदों सा उड़ने का हौसला रखता
दिलासा क्या दूँ दिल को, ये भटक रहा है किसी और की सरपरस्ती में उछल
शरीर थक गया, वहम का आगोश है और लोग कहते हैं जिंदगी में जोश है
धड़कने बयां करती है ज़िन्दगी की किश्तें सांसों का गुच्छा अब टूट रहा है आगजनी
सांप से ही दोस्ती पाली थी हमने चांवल की बोरी में धंसकर मरोगे जिरह क्या
रोज़ देखता हूँ आसपास तो सवालों से भरे चेहरे परेशां करते हैं वही बेचैनी, वही
समर्थ व्यक्ति वो नहीं जिसके पास अपार धन और वैभव है बल्कि समर्थ वो है
मेरा नूर जब भी मुझसे नाराज़ होता है, हमेशा मैं उसे मनाऊं यही सोचता है,
होश खो रहे हैं हम उनको कुछ फ़िक्र नहीं है क्या प्यार है ये, या