साहित्य बिखरे पन्ने… भाग -2 March 6, 2022 दुनिया से लड़ता हूँ लेकिन, खुद के दिल को कैसे मनाऊं बेगानी रूखी रातों में, साँसों को कैसे भरमाऊं बहरहाल
सुविचार जब आप संकल्प लेते हैं March 5, 2022 जब आप संकल्प लेते हैं तो आप आधी जीत तभी पूरी कर लेते हैं और बाकी का काम उस संकल्प
साहित्य प्यार में तेरे गजब हो गया March 5, 2022 प्यार में तेरे गजब हो गया मैं सिर्फ तेरी निगाहों में खो गया मुझसे न पूछ हाल मेरा क्या जब
साहित्य कुछ कच्चा पक्का लगता है February 27, 2022 प्यार की हद नहीं है, तुम इतना समझ लो कि मैंने दिल से किया और तुम्हारा कुछ कच्चा पक्का लगता
साहित्य कद्र कोई करता नहीं इन गजलों की यारों February 6, 2022 कद्र कोई करता नहीं इन गजलों की यारों सब खिल्ली उड़ाने का जरिया समझते हैं मैं अगर उनसे प्रेम से
साहित्य दिल करता है खोजबीन कि कुछ मिल जाए January 30, 2022 दिल करता है खोजबीन कि कुछ मिल जाए सुकून न सही मंजिल ही मिल जाए अपने दायरे में चंद सपने
साहित्य जुगनू हूं रात में गश्त लगाता हूं January 22, 2022 जुगनू हूं रात में गश्त लगाता हूं अपनी हैसियत के हिसाब से जगमगाता हूं मेरी क्या बिसात होगी चांद के
विचार , साहित्य अंधविरोध से देशविरोध तक January 18, 2022 मैं झूठे आरोपों और बरगलाने के लिए आता हूँ मैं खानदानी डकैतों को किसान बताता हूँ अंधविरोध के चक्कर में
साहित्य पेट की तड़प मिटाने को मैं घर से निकल आया January 16, 2022 पेट की तड़प मिटाने को मैं घर से निकल आया लेकिन इस शहर का पानी मुझे रास नहीं आया मैं
साहित्य इतना ही कहना है तुझसे मेरी माँ January 12, 2022 अपने हुनर और मेहनत की बदौलत सब कुछ पाउँगा एक दिन अपने इरादों में ज़रूर कामयाब हो जाऊंगा जिन्हे ग़लतफ़हमी