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जिंदगी पेचीदा है, शहर बज़्म से सजा है
साहित्य

जिंदगी पेचीदा है, शहर बज़्म से सजा है

May 28, 2022
जिंदगी पेचीदा है, शहर बज़्म से सजा है मेरे रुआब में कोई गर्द सा सटा है गैर जरूरी शिकवे यहां
दिलों में इरादों की मशाल लेकर चलता हूं
साहित्य

दिलों में इरादों की मशाल लेकर चलता हूं

May 3, 2022
कभी अपनी धुन में कभी बेपरवाह रहता हूं मैं परिंदों सा उड़ने का हौसला रखता हूं मुझे यकीन है कि
दिलासा क्या दूँ दिल को
साहित्य

दिलासा क्या दूँ दिल को

April 17, 2022
दिलासा क्या दूँ दिल को, ये भटक रहा है किसी और की सरपरस्ती में उछल रहा है जानता हूँ मैं
शरीर थक गया, वहम का आगोश है
साहित्य

शरीर थक गया, वहम का आगोश है

April 3, 2022
शरीर थक गया, वहम का आगोश है और लोग कहते हैं जिंदगी में जोश है चीख कर दुनिया ने मेरा
धड़कने बयां करती है ज़िन्दगी की किश्तें
साहित्य

धड़कने बयां करती है ज़िन्दगी की किश्तें

March 27, 2022
धड़कने बयां करती है ज़िन्दगी की किश्तें सांसों का गुच्छा अब टूट रहा है आगजनी होती है सोच में सभी
खुल रहे है दस्तावेज तो चिढ रहे हो
साहित्य

खुल रहे है दस्तावेज तो चिढ रहे हो

March 26, 2022
सांप से ही दोस्ती पाली थी हमने चांवल की बोरी में धंसकर मरोगे जिरह क्या करना जब सुनवाई नहीं है
रोज़ देखता हूँ आसपास तो
साहित्य

रोज़ देखता हूँ आसपास तो

March 23, 2022
रोज़ देखता हूँ आसपास तो सवालों से भरे चेहरे परेशां करते हैं वही बेचैनी, वही नाकामयाबी और वही फितूर इतने
आख़िर
साहित्य

आख़िर

March 20, 2022
मैं क्यों इस क़दर प्यार करूं मैं क्यों इस क़दर तुझपे मरूं देना तुझे अगर गम ही है तो, मैं
समर्थ व्यक्ति
सुविचार

समर्थ व्यक्ति

March 20, 2022
समर्थ व्यक्ति वो नहीं जिसके पास अपार धन और वैभव है बल्कि समर्थ वो है जो आलोचना को स्वीकार करने
मेरा नूर जब भी मुझसे नाराज़ होता है
साहित्य

मेरा नूर जब भी मुझसे नाराज़ होता है

March 17, 2022
मेरा नूर जब भी मुझसे नाराज़ होता है, हमेशा मैं उसे मनाऊं यही सोचता है, गलती किसी की भी नही
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