साहित्य संभलना जरा उस से नजरें बचाकर July 11, 2021 संभलना जरा उस से नजरें बचाकर कहीं बेवकूफ ना बना दे खूबसूरती दिखा कर आंखों ने बहुत धोखे दिए हैं
यात्रा वर्णन , विचार अनिश्चित… July 10, 2021 ये क्या प्रतिकूल परिस्थितियां है मेरे जीवन में, कहीं भी स्वतंत्रता का भान नहीं, बस जीवन व्यतीत हो रहा एक
साहित्य खाक बड़ा था ये समंदर भी June 20, 2021 खाक बड़ा था ये समंदर भी एक बूंद भी तिश्नगी इस से नहीं बुझी बढ़ाए थे अपने कदम कि रास्ते
साहित्य सांसें उखड़ रही है… भाग -2 May 27, 2021 सांसें उखड़ रही रही हैं जिंदगी उजड़ रही हैं ना पैसे का रूवाब है ना वक्त की बिसात है ये
साहित्य सांसें उखड़ रही है… भाग -1 May 24, 2021 सांसे उखड़ रही है वक्त से पहले उम्र भी पहले ही खत्म हो रही है जिंदगी को बचाने की जद्दोजहद
साहित्य भूख सर्दी से कम नहीं May 9, 2021 वो ठिठुरता हुआ कूड़ा बीनता है सर्दी में उसे पता है कि भूख सर्दी से कम नहीं कहां सुनवाई होती
साहित्य मेरे घर में तो आजकल दंगा है May 7, 2021 कौन से शहर का तू बाशिंदा है मेरे घर में तो आजकल दंगा है बस भाषणों तक सीमित रहती है
साहित्य रूह से रूबरू May 6, 2021 यूं किसकी फिराक में रहता है दिल रूह से रूबरू होता तो बाहर नहीं भटकता तेरा घूंघट चेहरे की हिफाज़त
साहित्य जुस्तजू May 4, 2021 मुझे नहीं तो मेरे एहसास को तवज्जो दे तुझे देखा है मैंने रोज़ खवाबों में तुझे देख गली से जब
कहानी , यात्रा वर्णन मेरी जीवन यात्रा March 23, 2021 दोस्तों मैं कुन्दन उर्फ जय आपको आज अपनी अभी तक की जीवन यात्रा के बारे में बताना चाहता हूं। मैं