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ज़िन्दगी खुलकर जिया जाए
साहित्य

ज़िन्दगी खुलकर जिया जाए

August 9, 2020
मौत की दस्तक का ऐसा है आलम कि फूली हुई सांस का जायजा लिया जाए। कहानी बेलौस है कि छूटती
मैं कहानी कहना चाहता हूं
साहित्य

मैं कहानी कहना चाहता हूं

May 3, 2020
मैं दूर गई यादों की झांकी को बताना चाहता हूं मैं कहानी कहना चाहता हूं शहर भी अपनी मौज मस्ती
उम्मीद की लौ एक नया दीया जलाती है
साहित्य

उम्मीद की लौ एक नया दीया जलाती है

April 26, 2020
कभी कुछ सोंचूं तो याद बह जाती है मेरे सिरहाने में आने से नींद कतराती है। आँख का धुंआ राख
ये धूप चटक होती है
साहित्य

ये धूप चटक होती है

April 12, 2020
ये धूप चटक होती है यूं सर्द गरम होती है अब शाम की फुहारों में दिन रात जलन होती है
जाने गमछा चैलेंज प्रतियोगिता के प्रतिभागी और विजेता के बारे में
ग्रामीण जीवन

जाने गमछा चैलेंज प्रतियोगिता के प्रतिभागी और विजेता के बारे में

April 10, 2020
Lockdown में सभी व्यक्तियों को घर मे रहना है और कोरोना महामारी को भारत से भगाना है। भारत के सभी
बिखरा – बिखरा सब हिल गया है
साहित्य

बिखरा – बिखरा सब हिल गया है

April 7, 2020
बिखरा - बिखरा सब हिल गया है टुकड़ा टुकड़ा मेरा दिल हुआ है सपनो के इस आकाश में उड़ता पंछी
खामियाज़ा
साहित्य

खामियाज़ा

April 3, 2020
देखूं जरा कहाँ इंसा का बसेरा है रोज कोई आवाज होती है कहीं पर कुछ गज़ब का किस्सा उबल रहा
इतने दिनों के बाद
साहित्य

इतने दिनों के बाद

March 31, 2020
कुछ अधपकी उम्मीदों को हथेली में रखकर आया है इस गली में कोई इतने दिनों के बाद संजोया हुआ ख्वाब
चेहरा – बेचेहरा
साहित्य

चेहरा – बेचेहरा

March 29, 2020
मेरी आवाज दरिया में खो सी गई है अँधेरे में रोशनी भी सो सी गई है सांसो में अब तो
कविता से संवाद
कहानी

कविता से संवाद

March 22, 2020
बहुत दिनों बाद मिला अपनी कविता से, उससे वार्तालाप हुई तत्पश्चात उसको मन के सूक्ष्म कोनों मे सम्माहित किया उस
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