साहित्य दिलासा क्या दूँ दिल को April 17, 2022 दिलासा क्या दूँ दिल को, ये भटक रहा है किसी और की सरपरस्ती में उछल रहा है जानता हूँ मैं
साहित्य शरीर थक गया, वहम का आगोश है April 3, 2022 शरीर थक गया, वहम का आगोश है और लोग कहते हैं जिंदगी में जोश है चीख कर दुनिया ने मेरा
साहित्य धड़कने बयां करती है ज़िन्दगी की किश्तें March 27, 2022 धड़कने बयां करती है ज़िन्दगी की किश्तें सांसों का गुच्छा अब टूट रहा है आगजनी होती है सोच में सभी
साहित्य खुल रहे है दस्तावेज तो चिढ रहे हो March 26, 2022 सांप से ही दोस्ती पाली थी हमने चांवल की बोरी में धंसकर मरोगे जिरह क्या करना जब सुनवाई नहीं है
साहित्य रोज़ देखता हूँ आसपास तो March 23, 2022 रोज़ देखता हूँ आसपास तो सवालों से भरे चेहरे परेशां करते हैं वही बेचैनी, वही नाकामयाबी और वही फितूर इतने
साहित्य आख़िर March 20, 2022 मैं क्यों इस क़दर प्यार करूं मैं क्यों इस क़दर तुझपे मरूं देना तुझे अगर गम ही है तो, मैं
सुविचार समर्थ व्यक्ति March 20, 2022 समर्थ व्यक्ति वो नहीं जिसके पास अपार धन और वैभव है बल्कि समर्थ वो है जो आलोचना को स्वीकार करने
साहित्य मेरा नूर जब भी मुझसे नाराज़ होता है March 17, 2022 मेरा नूर जब भी मुझसे नाराज़ होता है, हमेशा मैं उसे मनाऊं यही सोचता है, गलती किसी की भी नही
साहित्य होश खो रहे हैं March 14, 2022 होश खो रहे हैं हम उनको कुछ फ़िक्र नहीं है क्या प्यार है ये, या कोई चेहरा लगा है दुख
साहित्य सिंहासन वही है जिसमे भगवाधारी आए हैं March 12, 2022 जिनके कदमों ने हिम्मत की है बढ़ने की फिर मंजिलों के निशान मिल ही जाते हैं श्रीराम और भारत माता