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गाँव: जहाँ जीवन सिर्फ बसता ही नहीं खिलखिलाता भी है
ग्रामीण जीवन , यात्रा वर्णन , विचार

गाँव: जहाँ जीवन सिर्फ बसता ही नहीं खिलखिलाता भी है

November 12, 2022
मेरी उम्र अमूमन 5 साल तो बढ़ ही गयी होगी क्योंकि छठ पूजा के अवसर पर गाँव के प्राकृतिक एवं
मिलता नहीं है यारों मंज़िल का निशां
साहित्य

मिलता नहीं है यारों मंज़िल का निशां

October 20, 2022
मिलता नहीं है यारों मंज़िल का निशां कहाँ पर आसमान और ज़मीन होते हैं फुर्सत नहीं है ज़िन्दगी में, लेकिन
मुझे सब कुछ पुराना याद है
साहित्य

मुझे सब कुछ पुराना याद है

September 25, 2022
अपनी यादों का क्या करें साहब मुझे सब कुछ पुराना याद है दीवारों से उड़ती हुई धूल भी देखी ज़मीन
चिंगारी तभी सुलगती है जब हवा का साथ हो
साहित्य

चिंगारी तभी सुलगती है जब हवा का साथ हो

September 18, 2022
चिंगारी तभी सुलगती है जब हवा का साथ हो आग तभी लगती है जब धुआँ आस पास हो समंदर का
किसे शौक था गाँव से बिछड़ने का
ग्रामीण जीवन , साहित्य

किसे शौक था गाँव से बिछड़ने का

September 15, 2022
किसे शौक था गाँव से बिछड़ने का बस रोटी की लाचारी थी जो शहर आ गए अपनी मिटटी के सौंधी
अरविंद केजरीवाल: भारतीय इतिहास का सबसे शातिर, धूर्त और निकम्मा नेता
विचार

अरविंद केजरीवाल: भारतीय इतिहास का सबसे शातिर, धूर्त और निकम्मा नेता

September 4, 2022
कहते हैं कि शर्म को अगर बेचकर पैसे मिले तो बेशर्म और ग़ैर ज़िम्मेदार व्यक्ति वो भी कर देगा! ऐसे
बचपन का दुर्गापूजा
कहानी , ग्रामीण जीवन , विचार

बचपन का दुर्गापूजा

September 2, 2022
प्रत्येक व्यक्ति जब वो अपने बचपन को जी रहा होता है उस के लिए उमंग-उत्साह का त्यौहार है दुर्गापूजा। प्रातः
ये सांस का मुकद्दर भी कहां तक रहेगा
साहित्य

ये सांस का मुकद्दर भी कहां तक रहेगा

June 26, 2022
ये सांस का मुकद्दर भी कहां तक रहेगा वहीं, जहां धड़कनों का सैलाब बहेगा उनको कहां किस बात की कमी
जिंदगी पेचीदा है, शहर बज़्म से सजा है
साहित्य

जिंदगी पेचीदा है, शहर बज़्म से सजा है

May 28, 2022
जिंदगी पेचीदा है, शहर बज़्म से सजा है मेरे रुआब में कोई गर्द सा सटा है गैर जरूरी शिकवे यहां
दिलों में इरादों की मशाल लेकर चलता हूं
साहित्य

दिलों में इरादों की मशाल लेकर चलता हूं

May 3, 2022
कभी अपनी धुन में कभी बेपरवाह रहता हूं मैं परिंदों सा उड़ने का हौसला रखता हूं मुझे यकीन है कि
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